Panipat Encounter Case : पानीपत। हरियाणा के पानीपत में समालखा-नारायणा रोड पर हुई कथित पुलिस मुठभेड़ का मामला अदालत पहुंचने के बाद नया मोड़ ले चुका है। सोनीपत के सिसाना गांव निवासी प्रवीन उर्फ सोनू जाट को पानीपत की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है। पुलिस अदालत में उसके खिलाफ ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। इसी कथित मुठभेड़ में सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के आरोपी प्रियव्रत फौजी के भाई राकेश उर्फ राका की मौत हो गई थी, जबकि प्रवीन पैर में दो गोलियां लगने से घायल हुआ था। करीब डेढ़ साल तक चली कानूनी कार्यवाही के दौरान बचाव पक्ष ने पुलिस की कहानी और जांच पर कई सवाल उठाए।
अदालत में ऐसे उठे पुलिस की कहानी पर 5 बड़े सवाल
1. बरामदगी से पहले ही कार की पहचान कैसे हुई?
पुलिस ने अदालत में दावा किया था कि वारदात स्थल से आरोपियों के कब्जे से एक बलेनो कार बरामद की गई थी। पुलिस के मुताबिक, यह कार 25 जून 2023 को कैथल के पंकज नेगी से लूटी गई थी। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दस्तावेज पेश कर दावा किया कि कार के असली मालिक पंकज नेगी मुठभेड़ से एक दिन पहले, यानी 6 जुलाई को ही पानीपत थाने पहुंचकर अपनी गाड़ी की पहचान कर चुके थे। इस दलील के बाद कार की बरामदगी से जुड़ी पुलिस की कहानी पर सवाल खड़े हुए।
2. मेडिकल रिपोर्ट ने फायरिंग की दूरी पर उठाए सवाल
पुलिस की मुठभेड़ रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पुलिस और आरोपियों के बीच 12 से 15 फीट की दूरी से फायरिंग हुई थी। वहीं, बचाव पक्ष ने मेडिकल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए गोली चलने की दूरी पर सवाल उठाए। रिपोर्ट में जख्मों पर ‘ब्लैंकनिंग’ यानी बारूद के निशान मिलने का उल्लेख था। बचाव पक्ष के अनुसार, यह नजदीक से गोली चलने की ओर इशारा करता था। इस अंतर ने पुलिस की मुठभेड़ संबंधी थ्योरी को चुनौती दी।
3. बारूद के सैंपल नहीं लिए जाने पर सवाल
बचाव पक्ष के वकील तेजेंद्र मलिक ने अदालत में दलील दी कि यदि दोनों तरफ से फायरिंग हुई थी, तो आरोपियों के हाथों से बारूद के अवशेष के नमूने लेकर जांच कराई जानी चाहिए थी। आरोप लगाया गया कि पुलिस ने प्रवीन और राकेश के हाथों के सैंपल नहीं लिए। बचाव पक्ष के मुताबिक, जांच के दौरान इस महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान नहीं दिया गया। इससे यह साबित करने में मुश्किल हुई कि आरोपियों ने भी गोली चलाई थी।
4. मोहाली की मोबाइल लोकेशन ने बढ़ाई मुश्किल
प्रवीन और राकेश के परिजनों ने शुरुआत से आरोप लगाया था कि सीआईए-2 की टीम ने दोनों को कथित मुठभेड़ से पहले पंजाब के मोहाली से हिरासत में लिया था। परिजनों के मुताबिक, इसके बाद मुठभेड़ की कहानी तैयार की गई। अदालत के आदेश पर हुई जांच के दौरान सीआईए प्रभारी सौरभ की मोबाइल लोकेशन मोहाली में मिलने की बात सामने आई। बचाव पक्ष ने इसे अपनी दलीलों के समर्थन में रखा। इस घटनाक्रम ने पुलिस की ओर से बताई गई घेराबंदी और मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल खड़े किए।
5. एफआईआर और पॉलीग्राफ टेस्ट को लेकर भी उठे सवाल
घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिसकर्मियों पर कथित फर्जी मुठभेड़ और हत्या के आरोप लगाते हुए शिकायत दी थी। परिवार का आरोप था कि पुलिस ने अपनी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके अलावा, परिजनों ने आरोपी पुलिसकर्मियों का पॉलीग्राफ टेस्ट नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए। परिवार का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इन पहलुओं पर कार्रवाई जरूरी थी।
मां बोलीं- जज मेरे लिए भगवान का रूप
अदालत के फैसले के बाद प्रवीन की मां उर्मिला ने राहत जताई। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को इस कदर प्रताड़ित किया गया था कि जेल से बाहर आने के बाद भी वह डरा-सहमा रहता था। उर्मिला के मुताबिक, मुठभेड़ से पहले उनके बेटे के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपनी कहानी को सही साबित करने के लिए मुठभेड़ के बाद उनके बेटे पर तीन से चार और मामले दर्ज कर दिए, जो अभी अदालत में लंबित हैं।
उर्मिला ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अदालत के फैसले से उन्हें राहत मिली है। उन्होंने न्यायाधीश को अपने लिए भगवान का रूप बताया।
अदालत के फैसले से प्रवीन उर्फ सोनू जाट को इस मामले में राहत मिली है। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए पुलिस प्रताड़ना और अन्य मामलों में फंसाने के आरोप अलग कानूनी जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय हैं।

