इदरीश मोहम्मद, पन्ना। पन्ना और छतरपुर क्षेत्र में बहुचर्चित केन-बेतवा लिंक परियोजना तथा अन्य विकास योजनाओं से प्रभावित परिवारों के विस्थापन, उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर लंबा संघर्ष चला रही 25 वर्षीय युवा सामाजिक कार्यकर्ता दिव्या अहिरवार को आखिरकार न्याय मिल गया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर मुख्य पीठ में जस्टिस विवेक अग्रवाल की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने पन्ना पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और दर्ज किए गए मुकदमों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। हाईकोर्ट ने पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह से संदेह के दायरे में मानते हुए दिव्या अहिरवार को जमानत दे दी है।

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जेल गेट के बाहर उमड़ी भीड़, मां से लिपटकर फफक पड़ीं दिव्या

करीब 41 दिनों तक जिला जेल पन्ना में रहने के बाद जब दिव्या अहिरवार मुख्य द्वार से बाहर आई, तो उनके स्वागत के लिए लगभग एक दर्जन से अधिक गांवों से आए करीब 500 आदिवासी ग्रामीण एकत्र हो चुके थे। इनमें से कई ग्रामीण सैकड़ों मोटरसाइकिलों, ऑटो और पैदल ही केवल दिव्या से मिलने जेल पहुंचे थे। जेल गेट पर पहुंचते ही ग्रामीणों ने उनका जोरदार स्वागत किया और उन्हें फूल-मालाओं से लाद दिया। इस लंबी कानूनी लड़ाई और संघर्ष के बीच अपनी बेटी की रिहाई का बेसब्री से इंतजार कर रही उनकी मां गौरा बाई अपनी बेटी को देखते ही फफक-फफक कर रो पड़ीं और उससे लिपट गईं। इसके बाद पन्ना नगर में उनका एक भावुक जुलूस भी निकाला गया, जहां जगह-जगह लोगों ने उनका स्वागत किया।

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‘जेल में और मजबूत हो गई हूं’: दिव्या के तेवर बुलंद

जेल से बाहर आने के बाद मीडिया और समर्थकों से मुखातिब होते हुए दिव्या अहिरवार ने कहा कि वे जेल के अंदर और अधिक मजबूत होकर लौटी हैं। हालांकि, इस दौरान उन्होंने पन्ना पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर आरोप भी लगाए। केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित गरीब और आदिवासी परिवारों के अधिकारों की आवाज उठाने वाली दिव्या की इस रिहाई ने एक बार फिर इस विस्थापन के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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