Dharm Desk : हिंदू धर्म में एकादशी का खास महत्व है। साल में 24 एकादशियों में पापांकुशा एकादशी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की आराधना करने से जीवन में आने वाले कष्ट समाप्त हो जाते हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करनी चाहिए। आज पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु मंत्र का जाप करें और व्रत कथा का पाठ करें। पूजा के दौरान भगवान से परिवार में सुख-शांति की प्रार्थना करें।

पापांकुशा एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार पापांकुशा एकादशी की तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2.11 मिनट से 22 अक्टूबर को दोपहर 2.47 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 22 अक्टूबर को एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। आज भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने का विशेष महत्व होता है।

विजय मुहूर्त दोपहर 1.57 मिनट से 2.44 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त शाम 5.13 मिनट से 5.37 मिनट तक

पापांकुशा एकादशी क्यों करना चाहिए

प्राचीन कथाओं के अनुसार पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को पाप कर्मों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना अच्छा होता है। श्रद्धालु इस व्रत को मन की शुद्धि और आत्मसंयम से भी जोड़कर देखते हैं।

एकादशी पर व्रत रखने वाले भक्त फलाहार करते हैं और दिनभर भगवान का स्मरण करते हैं। कई लोग इस दिन भजन-कीर्तन और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ की गई पूजा से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। व्रत रखने वालों को अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर पारण करना चाहिए।