हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में लंबे समय से टल रहे छात्रसंघ चुनाव को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए इंदौर खंडपीठ ने 75 दिनों के भीतर चुनाव कराने के निर्देश दिए। अब विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने तय समय-सीमा में चुनाव संपन्न कराने की चुनौती।

इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में छात्रसंघ चुनाव को लेकर लंबे समय से चल रही मांग और कानूनी लड़ाई के बीच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को 75 दिनों के भीतर छात्रसंघ चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद DAVV में छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है।यह आदेश 5 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति पवन कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने अवमानना याचिका सिविल क्रमांक 7815/2026, अरुणेश मिश्रा विरुद्ध अनुपम राजन एवं अन्य में पारित किया। याचिकाकर्ता अरुणेश मिश्रा की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने पैरवी की।

पहले आदेश के बावजूद DAVV में चुनाव नहीं, पहुंचा मामला हाईकोर्ट

दरअसल, मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए थे। विद्यार्थियों की लोकतांत्रिक भागीदारी और अपने प्रतिनिधि चुनने के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए पूर्व में हाईकोर्ट की प्रधानपीठ जबलपुर में रिट याचिका क्रमांक 34295/2024 दायर की गई थी।इस याचिका में प्रदेश के सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग की गई थी। 3 अगस्त 2026 को मुख्य न्यायाधिपति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने इस मामले में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था।

सरकार के कैलेंडर में सितंबर में चुनाव, फिर भी नहीं हुआ पालन

सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 का अकादमिक कैलेंडर न्यायालय के सामने पेश किया था। इसमें सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए जाने का उल्लेख था। शासन के इसी जवाब और अकादमिक कैलेंडर को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्रत्येक महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने के निर्देश दिए थे।इसके बावजूद DAVV में चुनाव आयोजित नहीं किए गए। इसी को लेकर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर करते हुए सवाल उठाया कि जब हाईकोर्ट पहले ही पूरे प्रदेश में चुनाव कराने का आदेश दे चुका है, तो देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में अब तक चुनाव क्यों नहीं हुए?

75 दिन की समय-सीमा, अब विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पहले पारित आदेश और वर्तमान मामले के तथ्यों पर विचार किया। न्यायालय ने यह भी ध्यान में रखा कि पूर्व का आदेश पूरे मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने से जुड़ा था, जबकि वर्तमान अवमानना याचिका विशेष रूप से DAVV में चुनाव नहीं कराए जाने को लेकर थी। अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को 75 दिनों के भीतर चुनाव संपन्न कराने होंगे। लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव का इंतजार कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह आदेश अहम माना जा रहा है।

छात्र राजनीति में हलचल, अब चुनाव की तैयारी पर नजर

DAVV में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा लंबे समय से छात्र संगठनों के बीच चर्चा और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्र राजनीति फिर सक्रिय होने की संभावना है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन चुनाव की प्रक्रिया कब शुरू करता है, कार्यक्रम और चुनावी नियम किस तरह तय किए जाते हैं और 75 दिनों की निर्धारित समय-सीमा में पूरी प्रक्रिया कैसे संपन्न होती है। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश ने DAVV प्रशासन के सामने चुनाव कराने की जिम्मेदारी स्पष्ट कर दी है।

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