पटना। बिहार की राजधानी पटना जिले के बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के चम्पापुर गंगा घाट पर कर्मा पूजा की मूर्ति विसर्जन के दौरान एक बड़ा हादसा हो गया। हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व उस वक्त मातम में बदल गया, जब विसर्जन करने गए छह युवक गहरे पानी में जाने के कारण गंगा नदी में डूब गए। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों और प्रशासन की तुरंत कार्रवाई से तीन युवकों की जान बचा ली गई, लेकिन एक युवक की मौत हो गई और दो अन्य अभी भी लापता हैं।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के बबलू बगीचा गांव के रहने वाले छह युवक कर्मा पूजा संपन्न होने के बाद मूर्ति विसर्जन के लिए चम्पापुर गंगा घाट पहुंचे थे। सभी युवक उत्साह के साथ मूर्ति को विसर्जित करने के लिए गंगा नदी के पानी में उतरे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने या पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण सभी छह युवक गहरे पानी की चपेट में आ गए और एक-एक करके डूबने लगे।
ग्रामीणों की सूझबूझ से बची तीन की जान
युवक जब गहरे पानी में डूबने लगे, तो घाट पर चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने तुरंत अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगा दी। ग्रामीणों की तत्परता और साहस के कारण तीन युवकों को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा संकट टल गया, लेकिन बाकी तीन युवकों को बचाया नहीं जा सका।


एक का शव बरामद, दो की तलाश जारी
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसके दौरान एक युवक का शव नदी से बाहर निकाला गया। मृतक की पहचान बबलू बगीचा गांव निवासी साहिल कुमार (पिता – राम ईश्वर) के रूप में हुई है।
वहीं, इस हादसे में दो अन्य युवक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता युवकों की पहचान गोलू कुमार (पिता – अनिल कुमार) और बलबीर कुमार (पिता – बिनोद कुमार) के रूप में हुई है, जो दोनों बबलू बगीचा के ही रहने वाले हैं।
प्रशासन का रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत मौके पर राज्य आपदा अनुक्रिया बल (SDRF) की टीम को तैनात कर दिया। एसडीआरएफ के गोताखोर मोटरबोट और आधुनिक उपकरणों की मदद से गंगा नदी में लापता दोनों युवकों की तलाश के लिए युद्धस्तर पर अभियान चला रहे हैं।
इस हृदयविदारक घटना के बाद से बबलू बगीचा गांव में मातम पसरा हुआ है। त्योहार की खुशियां अचानक चीख-पुकार और आंसुओं में बदल गई हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।



