पटना। बिहार की राजधानी में साइबर पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने पिछले डेढ़ साल में 1 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पुलिस ने मुख्य आरोपी संजय कुमार (नालंदा) और उसके सहयोगी अभिषेक कुमार (नवादा) को रामकृष्ण नगर इलाके के जकरियापुर से गिरफ्तार किया है। दिलचस्प यह है कि 10वीं पास मास्टरमाइंड संजय अपनी गर्लफ्रेंड के इशारों पर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
हाजीपुर से चलता था ठगी का ‘फाइनेंसियल’ ऑपरेशन
साइबर SDPO नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि गिरफ्तार संजय का हाजीपुर की एक युवती के साथ डेढ़ साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। संजय ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह केवल एक मोहरा था; ठगी की पूरी योजना (Planning) और पैसों को ठिकाने लगाने का काम उसकी गर्लफ्रेंड ही करती थी। संजय और अभिषेक केवल उसके निर्देशों का पालन करते थे। यह गिरोह अब तक देश के विभिन्न राज्यों से आई 55 से अधिक शिकायतों में नामजद है।
लोन दिलाने के नाम पर ऐसे फंसाते थे जाल में
आरोपियों ने पटना के विजय भूषण के मकान में किराए पर फ्लैट लेकर अपना ठिकाना बनाया था। ये लोग लोगों को आसान किश्तों पर लोन दिलाने का लालच देते थे। शिकार को विश्वास में लेकर बैंक कर्मियों की मिलीभगत से उनका ‘जीरो बैलेंस’ अकाउंट खुलवाया जाता था। ठगी की रकम इसी अकाउंट में मंगवाई जाती थी ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके।
पीड़ित की जागरूकता से हुआ खुलासा
ठगों का खेल तब बिगड़ा जब उन्होंने आदित्य कुमार शर्मा नाम के युवक को लोन का झांसा देकर उसका अकाउंट खुलवाया। इस खाते में धोखाधड़ी की तीन किश्तों में कुल 66 लाख रुपये जमा किए गए। जब आदित्य ने अपने खाते में इतनी बड़ी राशि देखी, तो उसे धोखाधड़ी का संदेह हुआ और उसने तुरंत साइबर पुलिस में शिकायत कर दी।

बरामदगी और कार्रवाई
पुलिस ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन, 11 एटीएम कार्ड और दो चेक बुक बरामद किए हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस गिरोह के साथ किन बैंक कर्मियों की मिलीभगत थी और हाजीपुर की उस युवती की भूमिका इस अपराध में कितनी गहरी है। फिलहाल, दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उनसे मिली जानकारी के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

