पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव के काफिले के गुजरने के दौरान अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग में वेलफेयर ऑफिसर के पद पर तैनात अरविंद कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई। इस मामले में पीड़ित अधिकारी की शिकायत पर गर्दनीबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।

​स्कॉर्पियो की टक्कर और विवाद की शुरुआत

​शिकायत के मुताबिक, घटना 23 सितंबर 2026 की सुबह करीब 10 बजे की है। अरविंद कुमार अपनी बाइक से कार्यालय जा रहे थे। गर्दनीबाग धरना स्थल के पास एक काले रंग की स्कॉर्पियो ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। पीड़ित अधिकारी का दावा है कि यह स्कॉर्पियो पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के काफिले की थी। इस टक्कर से उनकी बाइक क्षतिग्रस्त हो गई और उनके पैर में चोट लग गई। जब उन्होंने वाहन को रोकने का प्रयास किया, तो गाड़ी से लगभग 10 लोग नीचे उतर आए।

​पिस्टल की बट और लोहे की रॉड से हमला

​पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने कहा कि यह पप्पू यादव का काफिला है और गाड़ी को हाथ कैसे लगाया। इसके बाद उनके साथ मारपीट शुरू कर दी गई। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि पुरुषोत्तम नाम के व्यक्ति ने पिस्टल की बट से उनके सिर पर वार किया, जिससे उनका सिर फट गया और वह जमीन पर गिर गए।
​इसके अलावा, सांसद पप्पू यादव पर लोहे की रॉड से उनके दाहिने हाथ पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। प्रेमचंद नामक व्यक्ति पर भी स्कॉर्पियो से लोहे की रॉड निकालकर सिर पर वार करने का आरोप है। पीड़ित का यह भी कहना है कि मारपीट के दौरान उनके गले से सोने की चेन झपट ली गई और पूरी घटना सांसद की मौजूदगी तथा उनके कहने पर हुई। बाद में मौके पर अन्य लोगों के पहुंचने पर उनकी जान बच सकी।

​पुलिस जांच और समर्थकों का पक्ष

​घटना के बाद पीड़ित अधिकारी ने गर्दनीबाग थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी और उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
​दूसरी ओर, पप्पू यादव के समर्थकों का दावा बिल्कुल उलट है। उनका कहना है कि अरविंद कुमार ने ही काफिले की गाड़ी का शीशा तोड़ दिया था, जिसके बाद यह विवाद बढ़ा और स्थिति तनावपूर्ण हुई। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।