राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। पीएम ई-बस सेवा के तहत आगामी 25 अगस्त से शहर के 14 प्रमुख मार्गों पर लगभग 25 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा। वर्तमान में इन बसों का ट्रायल तेजी से चल रहा है। ये सभी बसें जीपीओ स्थित मल्टी मॉडल हब से संचालित होंगी, जिससे रोजाना सफर करने वाले कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं और आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
​इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और प्रदूषण के स्तर में भी गिरावट आएगी। ये बसें शहर के विभिन्न महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स को जोड़ेंगी, जिनमें आर ब्लॉक से एम्स, इनकम टैक्स गोलंबर से दानापुर स्टेशन और बिहटा, तथा गांधी मैदान से कुर्जी और हाजीपुर तक के मार्ग शामिल हैं। इसके अलावा पालीगंज और बैरिया बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाकों के लिए भी निर्बाध बस सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

​लंबी दूरी के यात्रियों के लिए डीलक्स बसों का बेड़ा

​शहरी परिवहन के साथ-साथ अंतरराज्यीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए परिवहन निगम ने भी अपनी कमर कस ली है। निगम को कुल 149 नई एसी और नॉन-एसी डीलक्स बसें मिलनी हैं, जिनमें से 78 बसें फुलवारीशरीफ डिपो पहुंच चुकी हैं। बाकी बची हुई बसें भी इस महीने के अंत तक डिपो में आ जाएंगी।
​इन नई डीलक्स बसों का परिचालन आगामी प्रमुख त्योहारों के सीजन में शुरू किया जाएगा। इन बसों को मुख्य रूप से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे पड़ोसी और दूरस्थ राज्यों के लिए चलाया जाएगा। इसके अलावा, महिलाओं की सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए पांच पीएम ई-पिंक बसें भी पटना पहुंच चुकी हैं, जिससे ग्रामीण और अंतरजिला परिवहन को मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद है।

​अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं नई बसें

​यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन सभी नई बसों में बेहतरीन तकनीक और इंटीरियर का इस्तेमाल किया गया है:

  • ​सुरक्षा तंत्र: बसों के भीतर और बाहर दोनों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
  • ​लाइव ट्रैकिंग: सभी बसों में जीपीएस (GPS) की सुविधा दी गई है, जिससे यात्री और डिपो कंट्रोल रूम बस की लाइव लोकेशन ट्रैक कर सकें।
  • ​आधुनिक इंटीरियर: यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली आरामदायक सीटें और पूर्ण वातानुकूलित (AC) व्यवस्था की गई है।
  • ​लो-फ्लोर डिजाइन: बसों का फर्श नीचे (लो-फ्लोर) रखा गया है, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को बस में चढ़ने और उतरने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।