कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजधानी पटना में इन दिनों पोस्टर पॉलिटिक्स एक बार फिर अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री आवास और जदयू कार्यालय के पास लगे एक पोस्टर ने राज्य की राजनीतिक फिजा में गर्माहट ला दी है। यह पोस्टर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर आगामी 5 जुलाई को आयोजित होने वाली बहुजन महापंचायत के समर्थन में लगाया गया है।

​एनडीए नेताओं की तस्वीर पर मची खलबली

​इस पोस्टर की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें लगी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की तस्वीर है। इस पोस्टर के सामने आते ही सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। भरत तिवारी एनकाउंटर मामला पहले से ही विपक्ष के निशाने पर रहा है, और अब इस महापंचायत के पोस्टर में एनडीए के शीर्ष नेता की तस्वीर ने इसे एक नया मोड़ दे दिया है।

​एनडीए ने पल्ला झाड़ा

​पोस्टर में एनडीए के नेता की तस्वीर होने के बावजूद, गठबंधन के भीतर इसे लेकर सन्नाटा पसरा हुआ है। नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ एनडीए नेता ने स्पष्ट किया कि, एनडीए का कोई भी नेता या प्रतिनिधि इस बहुजन महापंचायत में भाग नहीं ले रहा है। यदि कहीं भी पोस्टर में एनडीए नेताओं की तस्वीरें लगाई गई हैं, तो यह पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। एनडीए खेमा इस पोस्टर से खुद को पूरी तरह अलग बता रहा है।

​तेज हो सकती है बिहार की सियासत

​विपक्षी दल पहले ही भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सरकार को घेरते रहे हैं। अब 5 जुलाई को होने वाली इस महापंचायत और उसमें लगे इन पोस्टरों ने इसे एक बड़ा मुद्दा बना दिया है। यह पोस्टर न केवल आगामी महापंचायत को लेकर ध्यान खींचने की एक कोशिश है बल्कि सरकार के लिए असहज स्थिति भी पैदा कर रहा है। राजधानी पटना के कई अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के पोस्टर देखे गए हैं जो फिलहाल शहर में मुख्य चर्चा का विषय बने हुए हैं। 5 जुलाई को महापंचायत के दौरान क्या कुछ निकलकर सामने आता है और प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।