Bihar: पटना यूनिवर्सिटी (PU) के छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। पटना सिविल कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में उबाल आ गया है। शांतनु शेखर ने अब इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने का मन बना लिया है।

​छात्र हितों के लिए लड़ना गुनाह नहीं: शांतनु शेखर

​जमानत याचिका खारिज होने पर शांतनु शेखर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि छात्र हितों की आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है। शांतनु का आरोप है कि उन्हें सरकार के दबाव में जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मुझे सिविल कोर्ट से न्याय की उम्मीद थी, क्योंकि मेरा कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इस कानूनी प्रक्रिया के कारण मेरा कार्यकाल प्रभावित हो रहा है और मैं चाहकर भी यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए काम नहीं कर पा रहा हूं।

​क्या था पूरा मामला?

​यह पूरा विवाद 30 मार्च को पटना यूनिवर्सिटी के नए प्रशासनिक और शैक्षणिक भवन (कला संकाय) के उद्घाटन समारोह के दौरान शुरू हुआ था। इस कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शिरकत करने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान छात्रों के एक गुट ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के विरोध में ‘गो बैक’ के नारे लगाए थे।

​पुलिस की कार्रवाई और गंभीर आरोप

​समारोह में हुए हंगामे के बाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाया था। पुलिस का आरोप है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने न केवल सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता और हाथापाई भी की। इस मामले में पुलिस ने छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर सहित छह छात्रों को नामजद आरोपी बनाया था।

​आगे की राह: हाईकोर्ट पर टिकी नजरें

​सिविल कोर्ट से झटका लगने के बाद अब शांतनु शेखर और उनके समर्थकों की उम्मीदें हाईकोर्ट पर टिकी हैं। समर्थकों का मानना है कि प्रदर्शन करना छात्रों का लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे ‘अपराध’ की श्रेणी में रखकर प्रताड़ित करना गलत है। आने वाले दिनों में कैंपस के भीतर आंदोलन और तेज होने के आसार हैं।