उत्तर प्रदेश सरकार ने पीसीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण को व्यवस्थित और व्यावहारिक बनाने के लिए नई नीति जारी की है. इसमें शुरुआती प्रशिक्षण से लेकर सेवाकाल के अलग-अलग चरणों और पदोन्नत अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने पीसीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाने के लिए मंगलवार को नई नीति जारी की. कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देव राज की ओर से जारी आदेश में चयनित अधिकारियों के साथ पदोन्नत अधिकारियों के लिए भी प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है. नीति में सेवाकाल के विभिन्न चरणों के अनुसार प्रशिक्षण की अवधि, पाठ्यक्रम और शैक्षणिक भ्रमण का खाका तैयार किया गया है.
रूपाम में होगा प्रशिक्षण
नई नीति के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रूपाम), लखनऊ में आयोजित किए जाएंगे. इन कार्यक्रमों में आधारभूत प्रशिक्षण, व्यावसायिक प्रशिक्षण, जिला स्तर पर कार्य अनुभव और पदोन्नति के अलग-अलग चरणों से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम शामिल होंगे.
इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिकारियों की प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व क्षमता को विकसित करना है. प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को सरकारी कामकाज के साथ-साथ क्षेत्रीय प्रशासन की व्यावहारिक चुनौतियों से भी परिचित कराया जाएगा.
दो महीने का आधारभूत प्रशिक्षण
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के माध्यम से चयनित अधिकारियों के लिए दो महीने का फाउंडेशनल प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है. इसमें लोक प्रशासन, राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था, विधानसभा की कार्यप्रणाली, निर्वाचन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, विभागों के बीच समन्वय और उत्तर प्रदेश की संस्कृति से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे.
विकास प्रशासन के तहत कृषि, ग्रामीण एवं शहरी विकास, वन और पर्यावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, उद्योग तथा ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की जानकारी भी दी जाएगी. अधिकारियों को भारतीय संविधान, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और अन्य महत्वपूर्ण कानूनों से परिचित कराया जाएगा.
पाठ्यक्रम में बजट तैयार करने, वित्तीय स्वीकृति, कोषागार की कार्यप्रणाली, ई-प्रोक्योरमेंट और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल से संबंधित प्रक्रियाएं भी शामिल हैं. इसके अलावा एमएस वर्ड, पावरपॉइंट, एक्सेल, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और राज्य सरकार के प्रचलित सॉफ्टवेयर का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा. इस चरण में आठ दिन का शैक्षणिक भ्रमण भी प्रस्तावित है.
फील्ड ट्रेनिंग और जिला प्रशिक्षण
आधारभूत प्रशिक्षण के बाद अधिकारियों को दो महीने का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा. इसके पहले चरण का उद्देश्य उन्हें उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के रूप में जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार करना है.
इस दौरान राजस्व कानून, न्यायालयीन आदेश लिखने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, निर्वाचन प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर ध्यान दिया जाएगा. इसके बाद छह महीने का जिला प्रशिक्षण होगा, जिसमें अधिकारी जिला प्रशासन के साथ काम करके वास्तविक परिस्थितियों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव प्राप्त करेंगे.
जिला प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मैक्रो-इकोनॉमिक्स जैसे विषय भी शामिल किए जाएंगे.
सेवाकाल के अनुसार प्रशिक्षण
नीति में व्यावसायिक प्रशिक्षण के दूसरे चरण के लिए दो महीने निर्धारित किए गए हैं. यह प्रशिक्षण पहले चरण और जिला प्रशिक्षण के बाद होगा. इसमें राजस्व मामलों, न्यायिक आदेश लेखन, कानून-व्यवस्था, सरकारी योजनाओं, निर्वाचन संबंधी कार्यों और प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया पर प्रशिक्षण दिया जाएगा.
पांच वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अधिकारियों के लिए मिड-कैरियर फेज-3 के तहत एक महीने का प्रशिक्षण प्रस्तावित है. इसमें सार्वजनिक नीति निर्माण, परियोजना प्रबंधन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल, ग्रामीण और शहरी विकास, भूमि अधिग्रहण, वित्तीय प्रबंधन तथा केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं से जुड़े विषय शामिल होंगे.
वहीं, दस वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अधिकारियों के लिए मिड-कैरियर फेज-4 के तहत चार सप्ताह का प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है. इस दौरान विकास के विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियों, उनके समाधान, अन्य राज्यों और देशों की बेहतर कार्यप्रणालियों तथा एआई आधारित प्रशासनिक नवाचारों की जानकारी दी जाएगी.
पदोन्नत अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण
नई नीति में पदोन्नत उपजिलाधिकारियों के लिए भी चार सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है. इसके तहत राजस्व कानून, भारतीय न्याय संहिता और अन्य आवश्यक कानूनों के साथ लोक प्रशासन, निर्वाचन प्रबंधन तथा व्यवहार विज्ञान से संबंधित केंद्रीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी.
इस तरह नई नीति में पीसीएस अधिकारियों के प्रशिक्षण को नियुक्ति के शुरुआती चरण से लेकर सेवाकाल के आगे के पड़ावों और पदोन्नति तक विस्तारित किया गया है.

