Dharm Desk – भाद्रपद अमावस्या इस बार 11 सितंबर को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 10 सितंबर की सुबह 10:33 बजे शुरू होगी और 11 सितंबर की सुबह 8:56 बजे समाप्त हो जाएगी, ऐसे में उदया तिथि के आधार पर 11 सितंबर को स्नान, दान, पितृ तर्पण और श्राद्ध से जुड़े कर्म किए जाएंगे। पितरों को प्रसन्न करने और घर के वाता वरण को शुद्ध रखने के लिए इस दिन कई तरह के धार्मिक उपाय भी किए जाते हैं।

11 सितंबर के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 से 5:18 बजे तक रहेगा। अमृत काल सुबह 7:05 से 8:37 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:53 से दोप हर 12:42 बजे तक रहेगा। वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 2:22 से 3:12 बजे और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:31 से 6:54 बजे तक रहेगा।

यह उपाय शाम को करें

अमावस्या की शाम घर में धूप देने की परंपरा रही है। इसके लिए गुग्गल, पीली सरसों, काले तिल और कपूर की जरूरत होगी । साथ में मिट्टी का एक पात्र या गोबर का उपला लिया जा सकता है। सबसे पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मिट्टी के पात्र में कपूर या गोबर का उपला जलाएं। जब धुआं निलकने लगे तो उसमें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में गुग्गल, पीली सरसों और काले तिल डालें।अब इस धूप को घर के मुख्य हिस्सों और कमरों में दिखाएं। इसके बाद पात्र को घर की दक्षिण दिशा में रख दें। पितरों से जुड़ी पूजा और तर्पण में दक्षिण दिशा का विशेष संबंध बताया गया है।

क्यों खास है यह उपाय?

अमावस्या का दिन पितरों के स्मरण और उनके निमित्त किए जाने वाले कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना है। इस दिन तर्पण, दान और जरूरतमंदों को भोजन कराने के साथ घर में धूप करने की भी परंपरा है। गुग्गल, तिल और सरसों से की गई, धूप को घर के वाता वरण की शुद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ किए गए ऐसे कर्मों से पितरों का आर्शीवाद मिलता है, और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसलिए भाद्रपद अमावस्या की शाम ये सरल उपाय करते समय पितरों का स्मरण करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य भी करें।