Business Desk – Persistent Systems QIP : IT कंपनी Persistent Systems ने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए 450 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,264.61 करोड़ रुपए जुटाने की योजना बनाई है। कंपनी का यह फैसला FY27 की दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद आया है।

इस तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछली तिमाही के मुकाबले 27.1% घटकर 352 करोड़ रुपए रह गया। हालांकि, बुधवार को शेयर करीब 3% की तेजी के साथ 5,858.50 रुपए पर बंद हुआ।
QIP फ्लोर प्राइस कितना तय किया?
Persistent Systems ने शुरुआत में QIP का फ्लोर प्राइस 5,550 रुपए प्रति शेयर रखा था। बाद में बोर्ड कमेटी ने इसे बढ़ाकर 5,761 रुपए प्रति शेयर कर दिया। कंपनी अपने विवेक के आधार पर फ्लोर प्राइस पर 5% तक डिस्काउंट दे सकती है।
फाइनल इश्यू प्राइस कौन तय करेगा?
कंपनी ने अभी QIP का अंतिम इश्यू प्राइस घोषित नहीं किया है। इसे बुक रनिंग लीड मैनेजर्स के साथ मिलकर तय किया जाएगा। इस प्रक्रिया में JPMorgan India, IIFL Capital Services और HSBC Securities and Capital Markets (India) की भूमिका रहेगी।
QIP से शेयरहोल्डर्स पर क्या असर होगा?
QIP के तहत कंपनी संस्थागत निवेशकों को शेयर जारी करके पूंजी जुटाती है। नए शेयर जारी होने पर मौजूदा शेयरधारकों की कुल हिस्सेदारी का प्रतिशत घट सकता है। इसे इक्विटी डाइल्यूशन कहते हैं। इसका वास्तविक असर जारी किए जाने वाले शेयरों की संख्या और अंतिम इश्यू प्राइस पर निर्भर करेगा।
Persistent Systems Q2 Results: मुनाफा घटा, रेवेन्यू बढ़ा
FY27 की दूसरी तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछली तिमाही के 483 करोड़ रुपए से 27.1% घटकर 352 करोड़ रुपए रह गया। दूसरी ओर, रेवेन्यू 4,303 करोड़ रुपए से 8.4% बढ़कर 4,664 करोड़ रुपए हो गया।
EBITDA बढ़ा, मार्जिन में गिरावट
कंपनी का EBITDA पिछली तिमाही के 686.8 करोड़ रुपए से बढ़कर 697.59 करोड़ रुपए हो गया, जो 1.57% की वृद्धि है। हालांकि, EBITDA मार्जिन 15.96% से घटकर 14.95% रह गया। यानी कंपनी की परिचालन कमाई बढ़ी, लेकिन रेवेन्यू के अनुपात में मार्जिन कम हुआ।
Persistent Systems Share Price का प्रदर्शन
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को शेयर करीब 3% चढ़कर 5,858.50 रुपए पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में इसमें 9% से ज्यादा और छह महीने में 15.5% से अधिक की तेजी दर्ज की गई।
QIP से मिलने वाली पूंजी कंपनी की वित्तीय योजनाओं के लिए अहम हो सकती है। हालांकि, निवेशकों को अंतिम इश्यू प्राइस, नए शेयरों की संख्या और कंपनी के मुनाफे व मार्जिन में बदलाव पर नजर रखनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है, निवेश की सलाह नहीं। निवेश का फैसला लेने से पहले कंपनी की आधिकारिक घोषणा और वित्तीय नतीजों की जांच करें।

