पटना। फुलवारी शरीफ प्रखंड की राजनीति में शुक्रवार को उस समय बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब प्रखंड प्रमुख ज्योति कुमारी के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह विफल हो गया। विरोधियों द्वारा बुलाई गई विशेष बैठक में संख्या बल की भारी कमी के कारण ज्योति कुमारी न केवल अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहीं, बल्कि उनका राजनीतिक कद और भी मजबूत होकर उभरा है।
17 सदस्यों ने दी थी चुनौती, पहुंचे सिर्फ दो
इस अविश्वास प्रस्ताव की पटकथा तब शुरू हुई थी जब प्रखंड के कुल 17 पंचायत समिति सदस्यों ने प्रमुख के खिलाफ असंतोष जताते हुए आवेदन दिया था। नियमानुसार, प्रखंड कार्यालय में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया था। कयास लगाए जा रहे थे कि बैठक में तीखी बहस और मतदान होगा, लेकिन परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत रहा। निर्धारित समय तक विरोध करने वाले खेमे से केवल 2 सदस्य ही सदन में पहुंचे। सदन में बहुमत की कमी के कारण यह प्रस्ताव चर्चा के स्तर तक भी नहीं पहुंच सका।
प्रशासनिक प्रक्रिया और आधिकारिक घोषणा
बैठक की अध्यक्षता कर रहे प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) विजय कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि नियमों के मुताबिक अविश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए सदस्यों का आवश्यक बहुमत अनिवार्य है। सदस्यों की अनुपस्थिति के कारण मतदान की नौबत ही नहीं आई। बीडीओ ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि ज्योति कुमारी फुलवारी शरीफ प्रखंड प्रमुख के पद पर बनी रहेंगी। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी और कानून सम्मत बताया।
”राजनीतिक साजिश का हुआ अंत” – ज्योति कुमारी
जीत के बाद ज्योति कुमारी के समर्थकों ने प्रखंड कार्यालय के बाहर जश्न मनाया। मीडिया से बात करते हुए प्रमुख ज्योति कुमारी ने इसे “विकास के विरुद्ध रची गई साजिश” बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश की थी, जिसे समिति के अन्य सदस्यों ने नकार दिया। उन्होंने अपनी प्राथमिकता गिनाते हुए कहा कि अब उनका पूरा ध्यान प्रखंड की ग्रामीण सड़कों, नालियों और शुद्ध पेयजल की अधूरी योजनाओं को पूरा करने पर होगा।
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