कुंदन कुमार/ पटना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 135वें संस्करण को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने देश की बढ़ती हुई आत्मनिर्भरता खेल जगत की उपलब्धियों और भारतीय सेना के अदम्य साहस को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से देश में हो रहे वायुयान निर्माण और वोकल फॉर लोकल के मंत्र पर जोर देते हुए नागरिकों को अपनी सांस्कृतिक और औद्योगिक जड़ों पर गर्व करने का संदेश दिया।
प्रेरणा का माध्यम: मन की बात
पटना के गौतम बुद्ध मंगल कार्यालय में इस कार्यक्रम को सुनने के बाद, पटना साहिब के सांसद रवि शंकर प्रसाद ने इसे दुनिया का सबसे प्रेरणादाई कार्यक्रम बताया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से निरंतर चल रहा यह कार्यक्रम देश को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर रहा है। सांसद ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से गैर-राजनीतिक मंच है, जिसका एकमात्र उद्देश्य राष्ट्र निर्माण और समाज के उन गुमनाम नायकों को सम्मानित करना है जो जमीनी स्तर पर बदलाव ला रहे हैं।
राष्ट्र गौरव के विविध आयाम
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कई महत्वपूर्ण विषयों को छुआ, जो भारत की बदलती तस्वीर को दर्शाते हैं:
- स्वदेशी निर्माण: भारतीय वायु सेना के लिए देश के भीतर ही वायुयान निर्माण की प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराया।
- सांस्कृतिक विरासत: मेघालय के विशिष्ट पुलों और संस्कृत विश्वविद्यालय की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चर्चा पर गर्व व्यक्त किया।
- सेना का शौर्य और खेल: प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना के पराक्रम की सराहना की और देश के खिलाड़ियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे शानदार प्रदर्शन को युवाओं के लिए प्रेरणा बताया।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
कार्यक्रम के पश्चात मीडिया से बात करते हुए रवि शंकर प्रसाद ने राहुल गांधी द्वारा महाराष्ट्र टीईटी (TET) पेपर लीक मामले पर उठाए गए सवालों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि राहुल गांधी केवल आधारहीन और गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी के जरिए राजनीति करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं को सलाह दी कि वे देश की प्रगति और रचनात्मक कार्यों में सकारात्मक भूमिका निभाएं।
मन की बात के इस एपिसोड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यह कार्यक्रम न केवल सूचना साझा करने का माध्यम है बल्कि यह देशवासियों को एक सूत्र में पिरोने और राष्ट्रहित के विषयों पर चर्चा करने का एक सशक्त मंच बन चुका है।

