पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) ने सुरक्षा, वेतन और अन्य प्रमुख मांगों को लेकर आज से अगले आदेश तक ओपीडी (OPD) सेवाओं को पूरी तरह बंद रखने का बड़ा ऐलान किया है। डॉक्टरों के इस आंदोलन से अस्पताल की ओपीडी व्यवस्था पर असर पड़ा है, हालांकि राहत की बात यह है कि गंभीर मरीजों के लिए आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गई हैं।
हिंसा के खिलाफ सख्त रुख
JDA ने हाल ही में अस्पतालों में डॉक्टरों के साथ हुई हिंसा की घटनाओं पर गहरी नाराजगी जताई है। संगठन ने पीएमसीएच और डीएमसीएच में डॉक्टरों पर हुए हमलों के मामलों में तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करने, संस्थागत एफआईआर दर्ज करने और अस्पताल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने की मांग की है। जेडीए अध्यक्ष सत्यम कुमार का कहना है कि राज्य में चिकित्सकों की सुरक्षा एक बेहद गंभीर मुद्दा है, जिस पर स्वास्थ्य विभाग को बिना किसी देरी के गंभीरता से विचार करना चाहिए ताकि डॉक्टर भयमुक्त होकर मरीजों का इलाज कर सकें।
सहरसा के डॉक्टरों पर हुई कार्रवाई की समीक्षा
एसोसिएशन ने सहरसा के दो चिकित्सकों डॉ. सुशील कुमार आजाद और डॉ. रोशन लाल के खिलाफ हाल ही में की गई कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा करने की पुरजोर मांग की है। संगठन का मानना है कि इस पूरे मामले की परिस्थितियों की गहराई से जांच होनी चाहिए और स्वास्थ्य विभाग को निर्णय लेने से पहले डॉक्टरों का पक्ष भी सुनना चाहिए।
बॉन्ड और एनओसी नीति में संशोधन की मांग
जूनियर डॉक्टरों ने बॉन्ड के तहत तैनात चिकित्सकों के वेतन और पदनाम में संशोधन की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि इन डॉक्टरों की वास्तविक जिम्मेदारियों के हिसाब से उनका उचित पदनाम और पारिश्रमिक तय किया जाना चाहिए। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग के 5 जून 2026 के संकल्प संख्या 3/विविध-01-19/2026 में एनओसी (NOC) से जुड़े प्रतिबंधात्मक प्रावधानों में भी बदलाव की मांग की गई है।
गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक सेवाएं जारी
भले ही ओपीडी सेवाएं बंद कर दी गई हैं, लेकिन मरीजों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन और जेडीए ने स्पष्ट किया है कि इमरजेंसी, आईसीयू और अन्य आवश्यक जीवनरक्षक सेवाएं पूरी तरह चालू रहेंगी। इससे गंभीर और आपात स्थिति वाले मरीजों के इलाज में कोई बाधा नहीं आएगी। JDA ने स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि डॉक्टर प्रतिनिधियों के साथ तुरंत बातचीत शुरू कर इन सभी चार प्रमुख मांगों का तय समय सीमा में समाधान निकाला जाए।


