यूरोपीय देश पोलैंड इस समय राजनीतिक संकट की दौर से गुजर रहा है. 30 अक्टूबर 2026 की शाम को एक ऐसा संवैधानिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया जिसके कारण सेनेगल जा रहे देश के राष्ट्रपति कारोल नवरोकी को बीच रास्ते से ही अपना विमान वापस वारसॉ मोड़ना पड़ा. पोलैंड में संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष बोगदान स्विएंत्कोव्स्की को निलंबित किए जाने के बाद राजनीतिक बवाल मच गया.
पोलैंड में प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और राष्ट्रपति कारोल नवरोकी के बीच सांविधानिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है.
प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क और राष्ट्रपति कारोल नावरोकी के बीच चल रही सत्ता की जंग उस वक्त विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गई, जब शुक्रवार रात राजधानी वारसॉ में स्थित संवैधानिक ट्रिब्यूनल के मुख्यालय को भारी पुलिस बल और सशस्त्र सुरक्षा इकाइयों ने घेर लिया.
पोलैंड की संवैधानिक अदालत के अध्यक्ष को उनके पद से हटा दिया गया. जिसके बाद प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. इसके बाद पुलिस अदालत की इमारत में पहुंची और उसकी सुरक्षा अपने हाथ में ले ली. शुक्रवार रात भारी हथियारों से लैस पुलिस ने वारसॉ में सांविधानिक न्यायाधिकरण के मुख्यालय को घेर लिया. इसके बाद राष्ट्रपति नवरोकी ने सेनेगल का अपना दौरा बीच में ही छोड़ दिया.
पोलैंड की संवैधानिक अदालत समेत न्यायपालिका के कई संस्थानों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लंबे समय से विवाद है. एक तरफ प्रधानमंत्री टस्क की यूरोप समर्थक सरकार है, तो दूसरी तरफ दक्षिणपंथी पार्टी लॉ एंड जस्टिस (PiS) है. राष्ट्रपति नवरोत्स्की PiS के सहयोगी हैं. उन्होंने इस साल संसद की ओर से चुने गए 6 जजों में से तीन को शपथ दिलाने से इनकार कर दिया था.
अदालत के अध्यक्ष को हटाने के फैसले के विरोध में अदालत के बाहर दर्जनों लोग जमा हुए थे. उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की यूरोप समर्थक सरकार ने गलत तरीके से हटाया है. जिसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी अदालत के बाहर प्रार्थना कर रहे थे, जबकि दूसरे लोग पोस्टर लेकर पहुंचे थे. इन पोस्टरों पर टस्क और उनकी सरकार के खिलाफ नारे लिखे थे.
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