भुवनेश्वर: केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 (MMDR Amendment Act, 2026) के खिलाफ ओडिशा में राजनीतिक पारा तेजी से चढ़ने लगा है। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने अपने INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों के समर्थन से 8 अक्टूबर को पूरे राज्य में 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है।

विपक्षी दलों ने इस संशोधित कानून को ओडिशा के प्राकृतिक एवं खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकारों पर सीधा हमला करार दिया है। उनका आरोप है कि यह नया कानून खनन क्षेत्र के नियंत्रण का केंद्रीयकरण करता है और खनिज निष्कर्षण से जुड़े कर (Tax) एवं उपकर (Cess) लगाने के राज्य सरकार के अधिकारों में भारी कटौती करता है।

मामले को रेखांकित करते हुए ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि केंद्र के इस नए कानून से ओडिशा को सालाना लगभग ₹12,000 करोड़ का राजस्व नुकसान उठाना पड़ सकता है। विपक्ष ने मांग की है कि संशोधन विधेयक पर केंद्र सरकार तुरंत पुनर्विचार करे। राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाया जाए। 8 अक्टूबर को प्रस्तावित यह बंद विपक्ष के एक व्यापक आंदोलन का हिस्सा है। इसके तहत प्रमुख खनन क्षेत्रों में 7 दिवसीय आर्थिक नाकेबंदी का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य खनिजों के निष्कर्षण और परिवहन गतिविधियों को ठप करना है।

सड़क पर आंदोलन के साथ-साथ विपक्षी दल विधायी स्तर पर भी सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने संशोधित खनन कानून के दुष्प्रभावों पर चर्चा करने और एक सामूहिक राज्यस्तरीय रणनीति तैयार करने के लिए ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र की मांग की है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति में तनातनी और बढ़ने की पूरी संभावना है।

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