भुवनेश्वर: संशोधित खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम यानी MMDR Act को लेकर ओडिशा विधानसभा के मानसून सत्र में तीखी राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के बीच सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक संतोष खटुआ ने बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष का मकसद राज्य और जनता के हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ को साधना है।

भाजपा विधायक संतोष खटुआ ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यदि विपक्ष को किसी नीति, नियम या कानून में कोई खामी नजर आती है, तो लोकतंत्र का तकाजा है कि वे सदन के भीतर उस पर सकारात्मक चर्चा करें। लेकिन बीजद और कांग्रेस के विधायक रोजाना केवल नए-नए मुद्दे उठाकर सदन की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास कर रहे हैं।

विधायक ने खान एवं खनिज अधिनियम के कानूनी पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 देश के खनिज संसाधनों के नियमन का केंद्रीय ढांचा है। समय के साथ इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:

2010 का संशोधन: कोयला और लिग्नाइट खदानों के रियायती आवंटन की प्रक्रिया के लिए धारा 11A जोड़ी गई थी।

2015 का ऐतिहासिक संशोधन: 2015 के MMDR संशोधन के तहत खदानों के आवंटन में ऑक्शन (नीलामी) की पारदर्शी प्रणाली को अनिवार्य बनाया गया।

केंद्र सरकार के नियमों का हवाला देते हुए संतोष खटुआ ने कहा कि नीलामी प्रक्रिया लागू होने से खदानों के आवंटन में विवेकाधिकार समाप्त हुआ है और निष्पक्षता आई है। इसके साथ ही जिला खनिज प्रतिष्ठान और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट जैसी व्यवस्थाओं के जरिए प्रभावित क्षेत्रों का विकास सुनिश्चित हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान विवेक के आधार पर खदानें बांटी जाती थीं, जबकि वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष पारदर्शिता से घबराकर ही विधानसभा में चर्चा से बच रहा है।