शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर हलचल तेज हो गई है, लेकिन आदिवासी समाज को इसके दायरे में रखने या बाहर रखने को लेकर अभी भी बड़ा ‘सस्पेंस’ बना हुआ है। हाल ही में कमेटी के सामने आदिवासियों के विवाह पंजीयन (मैरिज रजिस्ट्रेशन) को अनिवार्य करने के सुझाव के बाद अब इस मुद्दे पर प्रदेश में जोरदार सियासत शुरू हो गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और सत्ताधारी दल बीजेपी इस मामले को लेकर आमने-सामने आ गए हैं।
यह आदिवासियों के साथ धोखा और बांटने की राजनीति
आदिवासियों से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी बिना किसी को विश्वास में लिए यह कदम उठा रही है। अभिनव बारोलिया, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस ने कहा- “यह एक बहुत गंभीर विषय है। देश और प्रदेश में हर समाज और हर वर्ग, चाहे आदिवासी हो या मुस्लिम, सब इस देश में मिल-जुलकर निवास करते हैं। लेकिन आदिवासियों के हितों और उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ छेड़छाड़ करना ही बीजेपी का असली चेहरा है। यूसीसी को लेकर सरकार ने किसी को भी विश्वास में नहीं लिया। अब आदिवासियों के साथ धोखा किया जा रहा है और यह पूरी तरह से बांटने की राजनीति है।”
आदिवासी समाज पर लागू नहीं, विपक्ष न फैलाए भ्रम
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रम फैलाने की राजनीति करार दिया है। बीजेपी का कहना है कि उनके वरिष्ठ नेतृत्व का रुख इस पर पूरी तरह साफ है। गुंजन चौकसे, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी ने कहा-“हमारी सरकार और वरिष्ठ नेतृत्व ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि आदिवासी समाज पर यह लागू नहीं है। जब हम यूसीसी (समान नागरिक संहिता) की बात करते हैं, तो यह एक संवैधानिक कानून है। कानून बात करता है कि विवाह से संबंधित नियम, पैतृक संपत्ति के अधिकार आदि से जुड़े नियम हर समाज और हर धर्म पर एक समान तरीके से लागू हों, यही यूसीसी है। विपक्ष को इस संवेदनशील विषय पर भ्रम की राजनीति बंद करनी चाहिए।”
अंदर या बाहर… क्या होगा कमेटी का फैसला?
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में यूसीसी के लिए गठित ड्राफ्टिंग कमेटी के सामने फिलहाल कई तरह के सुझाव आए हैं, जिसमें आदिवासियों को पूरी तरह बाहर रखने से लेकर केवल विवाह पंजीयन अनिवार्य करने जैसे विकल्प शामिल हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दलों की इस सियासी बयानबाजी के बीच कमेटी आदिवासियों को लेकर अंतिम ड्राफ्ट में क्या रास्ता निकालती है।


