साहिबगंज। झारखंड गठन के 26 साल बाद भी आदिवासी बहुल संताल परगना के कई ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कहीं सड़क नहीं है, तो कहीं समय पर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसकी एक बानगी साहिबगंज जिले के बोरियो प्रखंड में देखने को मिली, जहां सड़क नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराह रही एक गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने खाट पर लादकर करीब चार किलोमीटर तक कीचड़ भरे रास्ते से पहुंचाया। गांव तक 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद ग्रामीणों को यह कदम उठाना पड़ा।

गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस, खाट बनी सहारा

मामला बोरियो प्रखंड की मोतीपहाड़ी बड़ा पंचायत अंतर्गत पोड़ैया बेड़ो गांव का है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी बुधना पहाड़िया की 19 वर्षीय पत्नी सुकुरमुनी पहाड़िन को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस को सूचना दी, लेकिन सड़क की बदहाली और कीचड़ भरे रास्ते के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।

ऐसे में ग्रामीणों ने गर्भवती महिला को खाट पर लिटाया और उसे उठाकर करीब चार किलोमीटर दूर पोड़ैया संथाली गांव तक ले गए। वहां से टोटो के जरिए महिला को बोरियो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया।

सड़क के अभाव में हर दिन परेशानी झेल रहे ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार, गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण लोगों को रोजमर्रा के कामों के साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है। बारिश के दौरान कीचड़ भरे रास्ते से आवागमन और मुश्किल हो जाता है।

कई बार आवेदन और आंदोलन, फिर भी नहीं बनी सड़क

ग्राम प्रधान चांदू मालतो के अनुसार, गांव तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार आवेदन दिए गए और आंदोलन भी किए गए, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द गांव तक पक्की सड़क बनवाने की मांग की है।

विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं का सवाल

झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। साहिबगंज की यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की जरूरत को फिर से उजागर करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की मांग पर कब तक कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में किसी मरीज या गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने के लिए इस तरह की मुश्किलों का सामना न करना पड़े।