रोहित कश्यप, मुंगेली। जिले में बरसात के साथ ही बिजली व्यवस्था को लेकर आमजनों की परेशानी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। नगरीय क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक अघोषित बिजली कटौती, घंटों बिजली गुल रहने, फाल्ट की स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने और शिकायतों पर अपेक्षित रिस्पांस नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। बिजली बंद होने से जहां आम लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है, वहीं पेयजल, निस्तारी, घरेलू कामकाज, व्यापार और छोटे व्यवसायों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा नाराजगी केवल बिजली कटौती को लेकर नहीं, बल्कि बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उपभोक्ताओं के प्रति कथित उदासीन रवैये को लेकर है। लोगों का कहना है कि बिजली बंद होने पर उपभोक्ता यह जानना चाहता है कि आखिर समस्या क्या है, बिजली कब तक आएगी और विभाग द्वारा इसे ठीक करने के लिए क्या कार्रवाई की जा रही है। लेकिन कई बार इन सामान्य सवालों का भी स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता।

न सूचना, न कटौती का समय, न बहाली की जानकारी

जिले में बिजली कटौती को लेकर उपभोक्ताओं की एक प्रमुख शिकायत यह है कि कई बार बिजली बंद होने से पहले किसी तरह की पूर्व सूचना नहीं दी जाती। अचानक बिजली गुल होने के बाद लोग विभागीय अधिकारियों और शिकायत केंद्रों से संपर्क करने की कोशिश करते हैं, लेकिन वहां से भी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।

उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि किसी तकनीकी खराबी, मेंटेनेंस या अन्य कारण से बिजली बंद की जानी है तो कम से कम इसकी जानकारी लोगों को दी जानी चाहिए, ताकि वे आवश्यक व्यवस्था कर सकें। लेकिन कई बार घंटों बिजली बंद रहने के बाद भी लोगों को यह तक पता नहीं होता कि समस्या किस कारण से आई है और बिजली कब तक बहाल होगी।

अधिकारी फोन नहीं उठाते, उठाएं तो ‘लाइनमैन से बात करो’

बिजली विभाग की व्यवस्था को लेकर सबसे गंभीर शिकायत अधिकारियों से संपर्क को लेकर सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि बिजली बंद होने पर जब वे जिम्मेदार अधिकारियों को फोन लगाते हैं तो कई बार फोन रिसीव नहीं होता। यदि बात हो भी जाए तो समस्या की जानकारी देने के बजाय उपभोक्ता को लाइनमैन से संपर्क करने की सलाह दे दी जाती है।

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कई बार अधिकारी स्वयं लाइनमैन से बात कराने की जिम्मेदारी उपभोक्ता पर डाल देते हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि बिजली विभाग के अधिकारी उपभोक्ताओं की समस्या सुनकर उसका समाधान बताने और स्थिति की जानकारी देने के लिए उपलब्ध नहीं होंगे, तो आम जनता आखिर किससे जवाब मांगे?

लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि अधिकारी और कर्मचारी जनता को सुविधा देने के बजाय कई बार प्रोटोकॉल और पद का हवाला देते नजर आते हैं। आम उपभोक्ता का कहना है कि वह किसी अधिकारी से व्यक्तिगत काम के लिए नहीं, बल्कि अपने घर और मोहल्ले की बिजली व्यवस्था को लेकर जानकारी लेने फोन करता है। ऐसे में उसे सम्मानपूर्वक और स्पष्ट जानकारी मिलना उसका अधिकार होना चाहिए।

‘फाल्ट आया है, बनाया जा रहा है’—लेकिन कब आएगी बिजली?

बिजली बंद होने की स्थिति में उपभोक्ताओं को अक्सर यह बताया जाता है कि फाल्ट आया है और उसे ठीक किया जा रहा है। लेकिन असली सवाल यह है कि फाल्ट कहां आया है, समस्या कितनी गंभीर है और बिजली बहाल होने में कितना समय लगेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी उपभोक्ताओं को क्यों नहीं दी जाती?लोगों का कहना है कि यदि विभाग के पास तकनीकी समस्या और उसके समाधान की जानकारी है तो उपभोक्ताओं को कम से कम अनुमानित समय बताया जा सकता है। इससे लोग अपनी जरूरतों के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था कर सकेंगे। लेकिन जब घंटों तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती तो परेशानी और नाराजगी दोनों बढ़ती जाती हैं।

टोल-फ्री नंबर भी अपेक्षित रिस्पांस नहीं दे रहा?

बिजली संबंधी शिकायतों के लिए जिले में टोल-फ्री व्यवस्था होने के बावजूद उपभोक्ताओं को अपेक्षित रिस्पांस नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने की व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी जब शिकायत के बाद समस्या की वास्तविक स्थिति, संबंधित टीम की कार्रवाई और समाधान का समय भी उपभोक्ता को पता चले।

केवल शिकायत दर्ज कर लेना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ता चाहता है कि उसकी शिकायत का समाधान हो और उसे यह जानकारी भी मिले कि समस्या का निराकरण कब तक होगा।

मरम्मत के नाम पर घंटों बिजली बंद, मेंटेनेंस पर भी सवाल

जिले के विभिन्न हिस्सों में लोगों की शिकायत है कि कई बार मरम्मत अथवा तकनीकी खराबी के नाम पर घंटों बिजली बंद रहती है। ऐसे में अब सवाल बरसात से पहले किए गए प्री-मानसून मेंटेनेंस कार्यों पर भी उठने लगे हैं।

हर साल बरसात से पहले बिजली लाइनों, खंभों, ट्रांसफार्मरों और अन्य विद्युत अधोसंरचना के रखरखाव का काम किया जाता है। इसका उद्देश्य बरसात के दौरान फाल्ट और बिजली आपूर्ति में व्यवधान को कम करना होता है। लेकिन यदि बरसात के दौरान बार-बार घंटों बिजली बंद हो रही है तो लोगों का सवाल है कि आखिर मेंटेनेंस कार्य कितना प्रभावी रहा? क्या मेंटेनेंस के दौरान वास्तविक समस्याओं को चिन्हित कर उनका स्थायी समाधान किया गया था या फिर यह प्रक्रिया महज कागजी खानापूर्ति और औपचारिकता बनकर रह गई?

सुबह 5 बजे गुल हुई बिजली, शाम 5 बजे आई

रविवार को सबसे ज्यादा बिजली की शिकायत नगर पंचायत जरहागांव और उससे जुड़े आसपास के गांवों में सामने आई। यहां सुबह करीब 5 बजे बिजली बंद हुई और लगभग 12 घंटे बाद शाम करीब 5 बजे बिजली बहाल हो सकी। करीब 12 घंटे तक बिजली बंद रहने के कारण लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी दिक्कत पेयजल और निस्तारी जल को लेकर सामने आई। घरों में पानी की व्यवस्था से लेकर रोजमर्रा के जरूरी काम तक प्रभावित हुए। खास बात यह रही कि बिजली बंद होने से पहले लोगों को किसी तरह की पूर्व सूचना नहीं मिली। अचानक बिजली गुल हुई और इसके बाद लोग विभाग से यह जानने के लिए संपर्क करने लगे कि आखिर बिजली क्यों बंद है और कब तक आएगी।

लोग फोन लगाते रहे, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला

जरहागांव में बिजली कटौती के दौरान लोगों ने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की। लोगों के मुताबिक कुछ अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया। जिनसे संपर्क हुआ, वहां भी कई लोगों को ‘लाइनमैन से बात करो’ कहकर आगे भेजे जाने की शिकायत सामने आई। कुछ लोगों का कहना है कि बात होने के बावजूद उन्हें यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि समस्या क्या है और बिजली कब तक बहाल होगी। केवल फाल्ट आने और उसे ठीक किए जाने की जानकारी दी जाती रही। ऐसे में 12 घंटे तक बिजली बंद रहने के दौरान लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि आखिर बिजली विभाग की ओर से उपभोक्ताओं को सही और समयबद्ध जानकारी देने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?

नाराज ग्रामीण आंदोलन के मूड में, कभी भी फूट सकता है गुस्सा

जरहागांव नगर और आसपास के गांवों में लंबे समय से बिजली व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग की लचर व्यवस्था और अधिकारियों के उदासीन रवैये ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया है। अब नाराज ग्रामीण आंदोलन का मूड बना रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों ने आमजनों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाले दिनों में लोगों का गुस्सा किसी भी दिन एनएच रोड पर चक्काजाम, बिजली कार्यालय का घेराव अथवा धरना-प्रदर्शन के रूप में सामने आ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों तक अपनी समस्या पहुंचाना और बिजली व्यवस्था में सुधार की मांग करना है। लेकिन लगातार अघोषित कटौती, घंटों बिजली बंद रहने और शिकायतों पर अपेक्षित रिस्पांस नहीं मिलने से अब लोगों का सब्र जवाब देता नजर आ रहा है।

जब विभाग के मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री हैं, तो जवाबदेही भी जरूरी

बिजली विभाग प्रदेश सरकार का महत्वपूर्ण विभाग है और वर्तमान में यह विभाग मुख्यमंत्री के पास है। आमजनों की समस्याएं शासन तक पहुंचाने और उनके निराकरण के लिए CM हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था भी संचालित है।ऐसे में लोगों का सवाल है कि जब सरकार आम नागरिकों की समस्याओं को सुनने के लिए व्यवस्था बना रही है, तब स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

आम नागरिक किसी अधिकारी से विशेष सुविधा नहीं मांग रहा। उसकी मांग सिर्फ इतनी है कि बिजली क्यों बंद है, समस्या क्या है और बिजली कब तक आएगी,इसकी सही जानकारी समय पर मिल जाए।

आमजन का सीधा सवाल,आखिर जवाबदेह कौन?

बिजली विभाग की व्यवस्था को लेकर सामने आ रही शिकायतों ने कई सवाल खड़े कर दिए है,-बिना पूर्व सूचना बिजली कटौती क्यों?घंटों बिजली बंद रहने पर उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं?जिम्मेदार अधिकारियों के फोन नहीं उठने की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं? फोन उठाने पर उपभोक्ता को लाइनमैन से बात करने की सलाह क्या विभागीय जवाबदेही है? टोल-फ्री शिकायत व्यवस्था का अपेक्षित रिस्पांस क्यों नहीं? बरसात से पहले किए गए मेंटेनेंस के बावजूद बार-बार फाल्ट क्यों? बिजली बहाली में लंबा समय लगने पर उपभोक्ताओं को अपडेट क्यों नहीं दिया जाता? और सबसे बड़ा सवाल—आखिर बिजली व्यवस्था की इस स्थिति के लिए जवाबदेह कौन है?

बरसात अभी जारी है। ऐसे में बिजली विभाग के सामने चुनौती सिर्फ फाल्ट ठीक करने की नहीं, बल्कि विश्वसनीय बिजली आपूर्ति, त्वरित शिकायत निराकरण और आम उपभोक्ताओं के प्रति जवाबदेह व्यवहार सुनिश्चित करने की भी है।

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