कुमार उत्तम, मुजफ्फरपुर। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK) ने मुजफ्फरपुर में आयोजित एक शिक्षक संवाद कार्यक्रम के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शिक्षकों के सातवें वेतनमान और युवाओं के रोजगार को लेकर कई बड़े और कड़े दावे किए हैं। प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में शिक्षक निर्वाचन चुनावों और आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर माहौल गर्म है।
सातवें वेतनमान को लेकर सरकार को खुली चुनौती
प्रशांत किशोर ने मंच से बोलते हुए कहा कि बिहार के इतिहास में यह पहला मौका है जब शिक्षक निर्वाचन चुनाव का मुख्य मुद्दा सातवां वेतनमान बन गया है। उन्होंने राज्य के शिक्षा मंत्री के उस बयान पर तंज कसा जिसमें अगले साल वेतनमान देने की बात कही गई थी।
PK ने दो टूक शब्दों में कहा:
शिक्षा मंत्री कह रहे हैं कि अगले साल सातवां वेतनमान देंगे। हम तो कहते हैं कि अगले महीने ही दे दीजिए, हम स्वागत करेंगे। अगर सरकार ने यह मांग पूरी नहीं की, तो जन सुराज और हमारे शिक्षक साथी मिलकर इसे उनके हलक से निकलवा कर रहेंगे।
उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि अगर बिहार में किसी को भी शासन करना है, तो उसे शिक्षकों के सातवें वेतनमान और युवाओं के रोजगार की बात करनी ही पड़ेगी, वरना जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।
जन सुराज की दो प्रमुख गारंटियां
मुजफ्फरपुर के शिक्षक संवाद के माध्यम से प्रशांत किशोर ने दो मुख्य गारंटियों पर मुहर लगाई:
- शिक्षकों का अधिकार: बिहार के सभी वर्गों के शिक्षकों को उनका हक दिलाते हुए सातवां वेतनमान अविलंब दिलवाना।
- युवाओं को रोजगार: राज्य के कम से कम 10 हजार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को नौकरी और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
दिल्ली के CJP प्रदर्शन और सरकार के डर पर वार
दिल्ली में हाल ही में हुए CJP (या छात्र/युवा संगठनों) के प्रदर्शन को रोकने के लिए बिहार से जाने वाली ट्रेनों और हवाई यात्राओं पर कथित रोक लगाने के प्रशासनिक कदमों पर भी PK ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सत्ता में बैठे लोगों को जनता और युवाओं की आवाज का कितना अधिक खौफ सता रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए याद दिलाया कि जब देश की राजधानी जंतर-मंतर पर 50 हजार बच्चों ने अपनी आवाज बुलंद की थी, तब देश के शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। शिक्षकों और बिहार के युवाओं के समर्थन और राजनीतिक ताकत के बिना दिल्ली की सत्ता में कोई भी दल राज नहीं कर सकता। उन्होंने बिहार के युवाओं और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे अपनी राजनीतिक कीमत को समझें और उसे बढ़ाएं।

