प्रयागराज के अतरसुइया क्षेत्र में पुलिस और औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने अवैध गोदाम से बड़ी मात्रा में नशीली और प्रतिबंधित दवाएं बरामद की हैं. पुलिस ने मुख्य आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है.
प्रयागराज. अतरसुइया क्षेत्र में पुलिस और औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने अवैध रूप से संचालित एक गोदाम का खुलासा किया है. कल्याणी देवी चौकी क्षेत्र में नाले के पास स्थित बंद गोदाम से 11,037 शीशी कोडीनयुक्त कफ सीरप, 11,825 नशीले इंजेक्शन, 35,520 कैप्सूल और 1,61,400 टैबलेट बरामद की गई हैं.
डीसीपी सिटी सागर जैन के मुताबिक, सोमवार रात करीब 2 बजे गश्त के दौरान अतरसुइया पुलिस को एक मकान के पीछे बने गोदाम में अवैध दवाओं के भंडारण की सूचना मिली थी. इसके बाद एसीपी अतरसुइया, थाना पुलिस और प्रयागराज के ड्रग इंस्पेक्टर की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की.
जांच के दौरान गोदाम के संचालन से संबंधित कोई वैध लाइसेंस या आधिकारिक दस्तावेज टीम को नहीं मिला. बरामद दवाओं की ड्रग इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ रुपये बताई गई है.
प्रतिबंधित दवाएं भी मिलीं
कार्रवाई के दौरान अलग-अलग कंपनियों के कोडीनयुक्त कफ सीरप के अलावा एनडीपीएस एक्ट के दायरे में आने वाले साइकोट्रोपिक साल्ट वाली दवाएं भी मिलीं. इनमें अल्प्राजोलम और ट्रामाडोल की टैबलेट के साथ ब्यूप्रेनॉर्फिन और पेंटाजोसिन लैक्टेट के बड़ी संख्या में इंजेक्शन शामिल हैं.
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट समेत संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है. आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों की ओर से दबिश दी जा रही है.
किराए के गोदाम से संचालन
जांच में सामने आया है कि गुजराती मोहल्ला निवासी अरुणी सहगल ने यह गोदाम एक बुजुर्ग महिला बेबी टंडन से किराए पर लिया था. पुलिस के अनुसार, गोदाम पिछले 10-11 महीनों से किराए पर था और आरोपी अपनी पत्नी के साथ मिलकर यहां से अवैध दवाओं के भंडारण और आपूर्ति का नेटवर्क चला रहा था.
जांच में आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास भी सामने आया है, जो एनडीपीएस एक्ट से जुड़ा बताया गया है. पुलिस अब मामले के अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है.
फार्मा कंपनियों से जांच
पुलिस और औषधि विभाग जब्त दवाओं के बैच नंबरों की जांच कर रहे हैं. इन बैच नंबरों के आधार पर संबंधित फार्मा कंपनियों से पत्राचार किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दवाएं किस स्तर से बाहर निकलीं और अवैध बाजार तक कैसे पहुंचीं.
पुलिस का कहना है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी के साथ ही दवाओं की सप्लाई चेन और उनके अवैध बाजार में पहुंचने के स्रोत का पता लगाने पर भी काम किया जा रहा है.



