President Droupadi Murmu Haryana Visit : कुरुक्षेत्र। हरियाणा की मेहमाननवाजी और पारंपरिक खानपान की झलक उस समय देखने को मिली, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल पहुंचीं। यहां उनका स्वागत हरियाणवी संस्कृति के पारंपरिक अंदाज में किया गया। उनके लिए तैयार विशेष भोजन में देसी घी, बूरा और चूरमे से लेकर सरसों का साग और मक्की की रोटी तक शामिल रही। खास बात यह रही कि राष्ट्रपति को परोसे गए भोजन में गुरुकुल के खेतों में प्राकृतिक तरीके से उगाए गए अनाज और सब्जियों का इस्तेमाल किया गया।
राष्ट्रपति की थाली में क्या-क्या परोसा गया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के लिए तैयार भोजन में हरियाणा के पारंपरिक स्वाद के साथ पौष्टिकता का भी ध्यान रखा गया। उनकी थाली में भरवां करेला, तोरई की सब्जी, मूंग की दाल, मल्टीग्रेन आटे की रोटी, चावल और रायता परोसा गया।
इसके अलावा हरियाणा की पहचान माने जाने वाले सरसों के साग और मक्की की रोटी ने भी भोजन का स्वाद बढ़ाया। देसी घी, बूरा और चूरमे के जरिए मेहमाननवाजी की पारंपरिक मिठास भी परोसी गई।
हरियाणा में देसी घी-बूरा से स्वागत की खास परंपरा
हरियाणा में किसी मेहमान के घर आने पर देसी घी और बूरा खिलाना सम्मान और अपनापन जताने का पुराना तरीका रहा है। ग्रामीण संस्कृति में इसे खास अतिथि सत्कार माना जाता है। चूरमा भी यहां के पारंपरिक खानपान का अहम हिस्सा है।
राष्ट्रपति के लिए भी इसी सांस्कृतिक परंपरा को ध्यान में रखकर भोजन तैयार किया गया। इस तरह उनकी थाली में केवल पकवान ही नहीं, बल्कि हरियाणा की लोक संस्कृति और खानपान की पहचान भी नजर आई।
प्राकृतिक खेती से तैयार हुआ राष्ट्रपति का भोजन
इस भोजन की एक और खासियत इसका प्राकृतिक खेती से जुड़ा होना था। गुरुकुल के खेतों में उगाए गए अनाज और सब्जियों से ही भोजन तैयार किया गया। इसका उद्देश्य प्राकृतिक खेती के महत्व और उससे मिलने वाले लाभों को भी सामने लाना था।
राष्ट्रपति ने प्राकृतिक खेती अपनाने पर दिया जोर
गुरुकुल में अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने आचार्य देवव्रत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे देशभर में गांव-गांव जाकर लोगों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि प्राकृतिक खेती के जरिए मिट्टी की उर्वरा शक्ति को दोबारा बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने रासायनिक खेती के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए धरती को फिर से उपजाऊ बनाने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक, प्राकृतिक खेती को अपनाने से मिट्टी की सेहत बेहतर रखने के साथ लोगों को कई बीमारियों से बचाने में भी मदद मिल सकती है।
इस तरह कुरुक्षेत्र के गुरुकुल में राष्ट्रपति का स्वागत हरियाणा के पारंपरिक स्वाद, ग्रामीण संस्कृति और प्राकृतिक खेती के संदेश के साथ खास बन गया।

