अजय सैनी, भिवानी. पंजाबी समुदाय के लोगों के लिए अपमानजनक रूप से प्रयुक्त किए जाने वाले शब्द “पाकिस्तानी” और “रिफ्यूजी (शरणार्थी)” को भेदभावपूर्ण एवं मानव गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली अभिव्यक्तियों के रूप में चिन्हित करने की मांग करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता प्रिया असीजा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को एक शिकायत भेजी।

प्रिया असीजा ने अपनी शिकायत में हाल ही में हिसार में सामने आए उस मामले का उल्लेख किया है, जिसमें एक पत्रकार को कथित रूप से फोन पर धमकी देते हुए “पाकिस्तानी” और “रिफ्यूजी” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक सोच को दर्शाती है, जिसमें पंजाबी समुदाय के लोगों को उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि और विभाजन के इतिहास के आधार पर अपमानित किया जाता है।


प्रिया असीजा ने कहा कि वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान लाखों पंजाबी परिवारों ने अपना सब कुछ खोकर भारत को चुना, देश के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया और राष्ट्र की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभाई। ऐसे समुदाय के लोगों को आज भी “रिफ्यूजी” या “पाकिस्तानी” कहकर नीचा दिखाने का प्रयास न केवल उनके पूर्वजों के संघर्ष और बलिदान का अपमान है, बल्कि यह भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त समानता और गरिमा के अधिकार के भी विरुद्ध है।


उन्होंने कहा कि किसी भारतीय नागरिक की देशभक्ति, पहचान और सम्मान पर प्रश्नचिह्न लगाने वाले ऐसे शब्द सामाजिक वैमनस्य को बढ़ावा देते हैं और राष्ट्रीय एकता की भावना को कमजोर करते हैं। इसलिए इस विषय को केवल व्यक्तिगत विवाद के रूप में नहीं बल्कि मानवाधिकार और सामाजिक सम्मान के मुद्दे के रूप में देखा जाना चाहिए।

प्रिया असीजा ने एनएचआरसी से मांग की है कि आयोग इस विषय पर संज्ञान लेकर केंद्र एवं राज्य सरकारों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे, ऐसे मामलों की निगरानी सुनिश्चित करे तथा समुदाय विशेष के विरुद्ध अपमानजनक और भेदभावपूर्ण भाषा के प्रयोग को रोकने हेतु प्रभावी कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है और किसी भी समुदाय को उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर अपमानित करना सभ्य समाज के मूल्यों के विपरीत है।