संजीव, सोनीपत। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय संरक्षक और पूर्व मंत्री प्रो. सम्पत सिंह ने एक महीने से चल रहे ‘सेवा संकल्प’ अभियान पर कड़ा ऐतराज जताया है। 21 सितंबर को सोनीपत के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए
उन्होंने आरोप लगाया कि जन समस्याओं को हल करने के बजाय जनता के पैसे, सरकारी मशीनरी और सरकारी संस्थानों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए किया जा रहा है। इस दौरान पार्टी जिलाध्यक्ष कुणाल गहलावत, प्रदेश सचिव सुरेश त्यागी, भूपेंद्र मलिक सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सरकारी तंत्र और संस्थानों के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति
प्रो. सम्पत सिंह ने कहा कि सेवा के नाम पर प्रस्तुत किया जा रहा यह कार्यक्रम जनता की कीमत पर आत्म-प्रचार का जरिया बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निकाय और विभिन्न विभागों को उनके मूल काम से हटाकर इन आयोजनों में झोंक दिया गया है। विशेषकर सरकारी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों और बच्चों को दीपोत्सव कार्यक्रमों में सैकड़ों दीपक जलाने में लगाया जा रहा है।
संसाधनों की बर्बादी और महंगाई का मुद्दा
इनेलो नेता ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री लोगों से संसाधनों की बचत और तेल की खपत 10 प्रतिशत कम करने की अपील करते हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़े स्तर पर दीप जलाने के लिए तेल का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने कहा कि रैलियों, बड़े कट-आउट, मीडिया प्रचार और बहु-कुंड यज्ञों पर सरकारी धन खर्च करने के बजाय इस पैसे से बढ़ती महंगाई से परेशान परिवारों की मदद की जानी चाहिए। किसी भी नेता के लिए सच्ची श्रद्धांजलि वास्तविक विकास, स्थायी रोजगार और गरीबों तक सुविधाएं पहुंचाना है।
बेरोजगारी और रोजगार गारंटी की मांग
प्रो. सिंह के अनुसार, हरियाणा और देश के सामने बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या है, जहां लाखों पढ़े-लिखे युवा रोजगार तलाश रहे हैं और सरकारी विभागों में पद खाली हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान पर खर्च हो रहे संसाधनों का इस्तेमाल रोजगार पैदा करने और बेरोजगार परिवारों को ‘रोजगार गारंटी कार्ड’ या आजीविका सहायता पैकेज देने में किया जा सकता था। दीये जलाने, थालियां या तालियां बजाने से बेरोजगारी और आर्थिक परेशानी दूर नहीं हो सकती।
अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा
उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल व्यक्ति-केंद्रित राजनीतिक प्रचार के लिए करने से लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है। बातचीत के दौरान उन्होंने ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर कथित 0.4 प्रतिशत टैक्स और जारी हॉर्मुज तथा लाल सागर संकट का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इन परिस्थितियों का भारत की आपूर्ति व्यवस्था और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसलिए सरकार को आत्म-प्रचार छोड़कर रोजगार, गरीबी और आर्थिक मजबूती पर ध्यान देना चाहिए।
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