Business Desk – Public Provident Fund : आज के समय में कई लोग सिर्फ म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में निवेश को ही प्राथमिकता देते हैं. खासकर युवा निवेशकों में यह ट्रेंड काफी देखने को मिलता है. लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव के बाद अब कई निवेशक फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स की ओर भी रुख कर रहे हैं.

अगर आप भी केवल म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो विशेषज्ञों के अनुसार आपको अपनी निवेश रणनीति में बदलाव की जरूरत है और साथ ही Public Provident Fund (PPF) में भी कुछ हिस्सा जरूर लगाना चाहिए.
बाजार जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित निवेश
PPF एक ऐसा निवेश विकल्प है, जिस पर शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता. यह सरकार द्वारा समर्थित स्कीम है, इसलिए इसमें सुरक्षा और भरोसा दोनों मिलता है. लंबी अवधि में यह स्कीम एक मजबूत फंड तैयार करने में मदद करती है, जिसे आप बच्चों की पढ़ाई, शादी या रिटायरमेंट जैसी जरूरतों के लिए उपयोग कर सकते हैं. यही कारण है कि कई लोग इसे अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग का अहम हिस्सा मानते हैं.
कम निवेश से शुरुआत और लचीला योगदान
PPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश सिर्फ 500 रुपए से शुरू किया जा सकता है. एक वित्त वर्ष में इसमें अधिकतम 1.5 लाख रुपए तक निवेश की सीमा तय है. इस स्कीम की अवधि 15 साल होती है, हालांकि 7 साल बाद आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है. मैच्योरिटी के बाद इसे 5 साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है.
इसमें निवेश करने के लिए हर महीने तय राशि डालना जरूरी नहीं है. जब भी आपके पास अतिरिक्त पैसा हो, आप निवेश कर सकते हैं, जिससे यह उन लोगों के लिए भी उपयोगी है जिनकी आय नियमित नहीं होती.
ब्याज दर और टैक्स में बड़ा फायदा
PPF पर वर्तमान में लगभग 7.1 प्रतिशत वार्षिक ब्याज मिलता है. इसे खास बनाता है इसका टैक्स स्ट्रक्चर, क्योंकि यह EEE (Exempt-Exempt-Exempt) कैटेगरी में आता है. इसका मतलब है कि निवेश पर कोई टैक्स नहीं लगता. मिलने वाले ब्याज पर भी टैक्स नहीं लगता. मैच्योरिटी राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है. इसके अलावा, पुराने टैक्स सिस्टम में धारा 80C के तहत इसमें निवेश पर टैक्स छूट भी मिलती है.
कितना बन सकता है रिटर्न?
अगर कोई निवेशक हर महीने 5000 रुपए PPF में निवेश करता है, तो 15 साल में कुल निवेश 9 लाख रुपए होगा. मैच्योरिटी पर यह बढ़कर लगभग 16,27,284 रुपए तक पहुंच सकता है. इसमें लगभग 7,27,284 रुपए का ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री मिलता है.
अगर निवेश बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति माह किया जाए, तो 15 साल में कुल निवेश 18 लाख रुपए होगा और मैच्योरिटी पर राशि लगभग 32,54,567 रुपए तक पहुंच सकती है, जो पूरी तरह टैक्स-फ्री होगी.

