पंजाब में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते (DA) का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं होने के आरोपों के बीच मुख्य सचिव के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई है। इस मामले में पंजाब सरकार के साथ पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड भी शामिल है।

दरअसल, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का लंबित महंगाई भत्ता दो सप्ताह के भीतर जारी किया जाए। हाईकोर्ट ने यह आदेश राज्य सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की उन अपीलों को खारिज करते हुए दिया था, जिनमें एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी गई थी। एकल पीठ ने भी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया डीए का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सरकार के खर्चों को लेकर भी सख्त टिप्पणी की थी। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के सभी लंबित बकाये का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक सरकार बड़े स्तर पर प्रिंट मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से विज्ञापन अभियान जैसे गैर-जरूरी खर्च नहीं करेगी।

इसके बाद 12 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अदालत ने उनसे जवाब मांगा था कि आदेशों का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने के मामले में उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती

मुख्य सचिव के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। शीर्ष अदालत में दाखिल याचिका में दलील दी गई है कि यह कार्यवाही एक रिट याचिका और लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) में दाखिल विभिन्न आवेदनों के आधार पर शुरू हुई थी, जबकि इन दोनों मामलों का पहले ही निपटारा किया जा चुका था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि आवेदकों ने अदालत के पुराने फैसले का कथित तौर पर पालन नहीं होने का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि, इसी मुद्दे को लेकर मूल याचिकाकर्ताओं की ओर से पहले ही अलग से दीवानी अवमानना की कार्यवाही शुरू की जा चुकी थी।

इस आधार पर याचिका में हाईकोर्ट के आपराधिक अवमानना संबंधी आदेश को चुनौती दी गई है। अब यह मामला पंजाब सरकार के लिए कानूनी रूप से अहम बन गया है, क्योंकि इसका सीधा संबंध सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित डीए भुगतान से है।