चंडीगढ़। सरकारी जमीनों पर बने अवैध धार्मिक ढांचों के मुद्दे पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट ऐसे अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दे चुका है, तो इन्हें नियमित करने की बात कैसे की जा सकती है।
कोर्ट ने पंजाब सरकार को अगली सुनवाई पर अपनी स्पष्ट नीति पेश करने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन ने अदालत को बताया कि वे अवैध धार्मिक इमारतों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से कहा गया कि अब तक 91 अवैध ढांचे हटाए जा चुके हैं जबकि 113 ऐसे निर्माण अभी भी सरकारी जमीन पर मौजूद हैं।
कोर्ट ने इन पर भी कार्रवाई कर अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का मामला यह मामला सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2009 में जारी निर्देशों से जुड़ा है जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सरकारी जमीनों पर बने अवैध धार्मिक अतिक्रमण हटाने और रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। कई राज्यों द्वारा समय पर पालन न करने पर यह जिम्मेदारी संबंधित हाईकोर्ट को सौंप दी गई थी।

उसी क्रम में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पहले ऐसे धार्मिक स्थलों की पहचान की जाए जो सरकारी जमीन पर बने हैं और फिर केस के मुताबिक उस पर फैसला लिया जाए लेकिन अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में जारी नहीं रहना चाहिए।
अधिकारियों से जवाब तलब
हाईकोर्ट ने हरियाणा और पंजाब के डायरेक्टर, लोकल बॉडी को भी निर्देश दिए हैं कि वे अवैध धार्मिक निर्माणों को लेकर विस्तृत जवाब दाखिल करें। अदालत ने साफ किया कि इस मुद्दे पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी लंबित मामलों पर ठोस कार्रवाई जरूरी है।
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