लवकुश बैरागी, आगर मालवा। अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी के बाद अब विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। रजत सौंदरीकरण के लिए मंदिर परिसर में एक गैर-शासकीय समिति ने श्रद्धालुओं से नगद, स्वर्ण और रजत दान प्राप्त किए जाने और उनके उपयोग में वित्तीय अनियमितता किए जाने के आरोपों के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। आगर मालवा कलेक्टर ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय संयुक्त जांच दल का गठन किया है।

आगर मालवा के नलखेड़ा में स्थित विश्व प्रसिद्ध माँ बगलामुखी मंदिर में भी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर प्रीति यादव ने तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया हैं। इस दल के अध्यक्ष मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बी. एस. सोलंकी होंगे, उनके साथ जिला कोषालय अधिकारी मनीष सोलंकी और नगर परिषद नलखेड़ा की मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिनी अग्रवाल को सदस्य बनाया गया है। यह समिति सात दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपेगी।

किस-किस की होगी जांच

जांच समिति को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वह यह जांच करे कि क्या मंदिर परिसर में अधिकृत प्रबंधन व्यवस्था से अलग समानांतर दान संग्रह की व्यवस्था संचालित की गई। इसके साथ ही समिति यह भी जांच करेगी कि श्रद्धालुओं से प्राप्त नगद, सोना और चांदी का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है, उसका लेखा-जोखा किस प्रकार रखा गया। संबंधित बैंक खातों और अभिलेखों की स्थिति क्या है और इस पूरे मामले में किसी अधिकारी, कर्मचारी, मंदिर प्रबंधन या अन्य संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही बनती है या नहीं।

मंदिर परिसर का निरीक्षण करेगा जांच दल

कलेक्टर के आदेश में यह भी कहा गया है कि जांच दल तत्काल मंदिर परिसर का निरीक्षण करेगा। आवश्यक दस्तावेज, साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगा और अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट और अनुशंसाएं सात दिनों के भीतर प्रस्तुत करेगा। यानी अब यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जांच के दायरे में आ चुका है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से यह साफ होगा कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है और प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल इस पूरे मामले पर नजर बनी हुई है।

महाभारत काल और सतयुग से जुड़ी हैं मान्यताएं

आपको बता दें कि बगलामुखी माता का इतिहास और पौराणिक मान्यताएं महाभारत काल और सतयुग से जुड़ी हुई हैं। तांत्रिक शाक्त परंपरा में माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं देवी है, उन्हें ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग और पीले वस्त्र अत्यंत प्रिय है। पौराणिक पृष्ठभूमि (सतयुग) पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में एक समय ऐसा प्रलयंकारी तूफान आया जिससे पूरी सृष्टि नष्ट होने लगी थी, इस संकट से घबराकर भगवान विष्णु ने महादेव (शिव) से उपाय पूछा,शिव जी के निर्देश पर भगवान विष्णु ने सौराष्ट्र क्षेत्र (गुजरात) में ‘हरिद्रा सरोवर’ (हल्दी की झील) के किनारे कठोर तपस्या की, विष्णु जी की भक्ति से प्रसन्न होकर आदि शक्ति ने जल से स्वर्ण-पीले रंग की ज्योति के रूप में माता बगलामुखी के रूप में अवतार लिया और भयंकर तूफान को रोककर ब्रह्मांड की रक्षा की,महाभारत काल (द्वापर युग) बगलामुखी माता को ‘शत्रु संहारक’ और ‘स्तंभन’ की देवी माना जाता है।

महाभारत के युद्ध में कौरवों पर विजय प्राप्त करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर धर्मराज युधिष्ठिर ने माता बगलामुखी की आराधना की थी, ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए ही इन मंदिरों की स्थापना और गुप्त पूजा की थी,प्रमुख सिद्धपीठ दुनिया भर में माता बगलामुखी के तीन मुख्य प्राचीन और सिद्ध मंदिर हैं, जहां तंत्र साधना और विशेष हवन किए जाते हैं। उनमे से यह एक सिद्ध पीठ है,मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा (आगर-मालवा, मध्य प्रदेश) लखुंदर नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन मंदिर द्वापरयुगीन माना जाता है, जहां माता त्रिशक्ति (बगलामुखी, लक्ष्मी, और सरस्वती) के रूप में विराजमान हैं, यहाँ के बगलामुखी हवन दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।

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