Odisha Desk, भुवनेश्वर: ओडिशा के आदिवासी बहुल इलाकों के सर्वांगीण विकास और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के उद्देश्य से गठित विशेष विकास परिषद (Special Development Council – SDC) के सुचारू संचालन को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। परिषद के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की औपचारिक घोषणा के काफी समय बीत जाने के बावजूद इन परिषदों को आवश्यक सुविधाएं, बुनियादी ढांचा और वित्तीय संसाधन न मिलने के आरोप लगे हैं। इस स्थिति से नाराज SDC अध्यक्षों ने मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्याओं का समाधान करने की गुहार लगाई है।
विशेष विकास परिषदों को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए अध्यक्षों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को 11 सूत्री मांगों से संबंधित एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें:
प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार: परिषदों को बिना किसी रुकावट के कार्य करने योग्य बनाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियां प्रदान की जाएं।
मजबूत बुनियादी ढांचा: सुचारू कामकाज के लिए सरकारी वाहन, योग्य प्रशासनिक कर्मचारी तथा अध्यक्षों व उपाध्यक्षों के लिए उपयुक्त आवास की व्यवस्था की जाए।
पर्याप्त बजट व फंड: आदिवासी कल्याण से जुड़ी योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए पर्याप्त और समयबद्ध बजट आवंटित किया जाए।
राजनीतिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्तियों के बावजूद यदि परिषदों को बुनियादी ढांचा, आवश्यक मानव संसाधन और वित्तीय सहायता नहीं मिलती है, तो इनके गठन का वास्तविक उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।
ज्ञापन में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि परिषदों को सशक्त बनाकर ही आदिवासी क्षेत्रों में विकास की गति को तेज किया जा सकता है। अब देखना यह होगा कि SDC अध्यक्षों की इन 11 सूत्री मांगों पर राज्य सरकार क्या कदम उठाती है और परिषदों को क्रियाशील बनाने के लिए कितनी जल्द निर्णय लेती है।
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