नई दिल्ली। भारतीय महिला शतरंज खिलाड़ी आर वैशाली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फिडे विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर इतिहास रच दिया है। इस जीत के साथ वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं।
अब वर्ल्ड चैंपियन जू वेनजुन से टक्कर

इस जीत के बाद वैशाली अब चीन की मौजूदा विश्व चैंपियन जू वेनजुन को महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए चुनौती देंगी। जू वेनजुन पांच बार की विश्व चैंपियन हैं और लंबे समय से महिला शतरंज में अपना दबदबा बनाए हुए हैं। ऐसे में वैशाली के सामने कड़ी चुनौती होगी।
आखिरी राउंड में शानदार जीत
टूर्नामेंट के निर्णायक मुकाबले में वैशाली ने बेहतरीन संयम दिखाते हुए कैटरीना लैग्नो को हराया। वहीं, दूसरी प्रतिद्वंद्वी बिबिसारा असाउबायेवा को भारत की दिव्या देशमुख ने ड्रॉ पर रोक दिया, जिससे वैशाली की स्थिति मजबूत हो गई। अंततः उन्होंने सफेद मोहरों से खेलते हुए जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया।
8.5 अंकों के साथ किया कमाल
वैशाली ने पूरे टूर्नामेंट में 8.5 अंक हासिल किए और कोनेरू हम्पी के नक्शेकदम पर चलते हुए देश के महिला शतरंज को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
6 साल की उम्र से शुरू हुआ सफर
21 जून 2001 को चेन्नई में जन्मी वैशाली ने महज 6 साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया। उन्होंने अंडर-12 और अंडर-14 वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप में खिताब जीते। 2018 में वुमन ग्रैंडमास्टर (WGM) बनीं, 2021 में इंटरनेशनल मास्टर (IM) का खिताब हासिल किया और 2023 में ग्रैंडमास्टर (GM) बनने वाली भारत की तीसरी महिला बनीं।
भाई-बहन की ऐतिहासिक जोड़ी

गौरतलब है कि वैशाली के छोटे भाई आर प्रज्ञानानंद भी ग्रैंडमास्टर हैं। 2024 में दोनों इतिहास की पहली ऐसी भाई-बहन की जोड़ी बने, जिनके पास एक साथ ग्रैंडमास्टर का खिताब रहा। इस जोड़ी ने भारतीय शतरंज को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
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