कैथल। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के बीच हरियाणा भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राज रमन दीक्षित ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े इतने गंभीर विषय पर राजनीति करने के बजाय जनता के सामने पूरे आंकड़े, आधिकारिक रिकॉर्ड और संशोधन प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। केवल बड़े आंकड़े पेश करके संवैधानिक संकट का माहौल बनाने के बजाय तथ्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
राज रमन दीक्षित ने कहा कि प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, करीब 95 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 82 करोड़ लोगों ने गणना फॉर्म जमा किए, जबकि करीब 13 करोड़ नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हुए। इन आंकड़ों में लगभग 2.89 करोड़ मृत मतदाताओं और 1.01 करोड़ डुप्लीकेट प्रविष्टियों का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि शेष नामों के संबंध में अनुपस्थिति, स्थान परिवर्तन और सत्यापन जैसी स्थितियों का भी स्पष्ट विवरण सामने आना चाहिए, ताकि पूरी तस्वीर जनता के सामने आ सके।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर दिया जोर
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों में फॉर्म-6 के माध्यम से दो करोड़ से अधिक लोगों के नाम दर्ज कराने और फॉर्म-7 के जरिए लगभग 29 लाख नाम हटाए जाने का उल्लेख भी किया गया है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाएं मौजूद हैं। इसलिए प्रत्येक आंकड़े की आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि किसी पात्र भारतीय नागरिक का नाम गलती से न कटे और उसका मताधिकार सुरक्षित रहे। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम त्रुटिवश सूची से हट गया है, तो उसकी शिकायत की जांच कराकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम दोबारा शामिल कराया जाना चाहिए।
पारदर्शिता और जवाबदेही से ही मजबूत होगा लोकतंत्र
राज रमन दीक्षित ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि हैं। मतदाता सूची के इतने बड़े स्तर पर किए जाने वाले संशोधन में अधिकारियों के साथ राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों की भूमिका और भागीदारी का भी महत्व है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया का आकलन राजनीतिक आरोपों के बजाय आधिकारिक आंकड़ों, दस्तावेजों और उचित सत्यापन के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। साथ ही, राजनीतिक दलों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे किसी आंकड़े को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत न करें। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या त्रुटि सामने आने पर उसका समाधान निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
सोनिया गांधी से जुड़े पुराने विवाद पर भी रखी बात
सोनिया गांधी से संबंधित पुराने मतदाता सूची विवाद का उल्लेख करते हुए राज रमन दीक्षित ने कहा कि इस मामले में लगाए गए आरोपों और संबंधित रिकॉर्ड की जांच तथ्यों तथा लागू कानून के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में मतदाता बनने की पात्रता कानून के अनुसार निर्धारित होती है। केवल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज होने से उसे भारतीय नागरिकता या मतदान का वैध अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता।
पात्र मतदाता का वोट न छूटे, अपात्र नाम भी हटें
राज रमन दीक्षित ने कहा कि मतदाता सूची में अपात्र नाम नहीं होने चाहिए और किसी भी पात्र भारतीय नागरिक का वोट नहीं छूटना चाहिए। चुनाव आयोग को सूची को शुद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए। वहीं, राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे जनता के सामने सही संदर्भ में तथ्य रखें और किसी भी शिकायत या त्रुटि के समाधान के लिए उचित प्रक्रिया अपनाएं।
अंत में उन्होंने राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं से अपील की कि वे किसी भी आरोप को राजनीतिक मुद्दा बनाने से पहले पूरे आंकड़े और आधिकारिक तथ्य सामने रखें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि निष्पक्ष सत्यापन, पारदर्शिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा से सुनिश्चित होती है।

