यूनिवर्सल हेल्थ को लेकर राहुल गांधी ने ली विशेषज्ञों की राय, कहा- स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, इनके बिना देश का विकास संभव नहीं

रायपुर- मायाराम सुरजन फाउंडेशन द्वारा आयोजित यूनिवर्सल हेल्थ केयर कार्यक्रम में आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी शामिल हुए. कार्यक्रम में राहुल गांधी ने यूनिवर्सल हेल्थ को लेकर विशेषज्ञों की राय ली. इस मौके पर उन्होंने कहा कि लोगों के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार यह तीन सर्वोच्च प्राथमिकता हैं. और इन तीनों का कोई विकल्प नहीं है और इनके बिना देश में कोई विकास संभव नहीं है.

राहुल गांधी ने विभिन्न वर्गों से आए प्रश्नों के जवाब में कहा कि देश में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व किसी भी नीति के बनाने में होता है और सबका अपना महत्व होता है. उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों,  मेडिकल कॉलेजों सहित निजी क्षेत्र की भागीदारी स्वास्थ्य के सर्विस प्रोवाइडर के रूप में स्थापित है और सबको पूरी प्रतिबद्धता से इसे निभाने की जरूरत है. उन्होंने यह भी मत व्यक्त किया कि कांग्रेस की सरकार आने वाले दिनों में 3 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद का स्वास्थ्य के क्षेत्र में और 6 प्रतिशत सकल घरेलू उत्पाद का शिक्षा के क्षेत्र में वह करने के लिए प्रतिबद्ध है. इन प्रणालियों को ठीक करने के लिए दूरगामी नीति की आवश्यकता है, जिसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरा किया जाएगा. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस सभी को साथ लेकर चलने वाली पार्टी है.

इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव, विभिन्न स्वयंसेवी संस्था, कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी एवं चिकित्सा जगत के महत्वपूर्ण हस्ती शामिल हुए. कार्यक्रम में यह मांग भी रखी गई कि स्वास्थ्य को एक बुनियादी अधिकार बनाया जाए. कांग्रेस पार्टी की तरफ से यह आश्वासन भी मिला कि कांग्रेस पार्टी यदि 2019 में चुनकर आती है तो पूरे देश में और छत्तीसगढ़ में सभी के लिए स्वास्थ्य के अधिकार का अनुपालन कर आएगी और इसे एक बुनियादी अधिकार के रूप में स्थापित करेगी.

इस अवसर पर आम राय बनी की बीमा कंपनियों द्वारा संचालित कार्यक्रम व योजनाएं स्वास्थ्य समस्याओं के लिए पूरी तरह कार्य नहीं है और उन्हें बहुत सी कमियां हैं. सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली का विकल्प बीमा कंपनी क्षेत्र से नहीं आ सकता. उसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को ही सुदृढ़ करना पड़ेगा और उसमें सभी की सहभागिता निजी क्षेत्र को साथ लेकर सुनिश्चित करनी पड़ेगी, जिसमें डॉक्टर, स्वास्थ्य कर्मचारी, मितानिन आंगनवाड़ी के कार्यकर्ता हैं. इनके साथ जो उद्योग घराने हैं उद्योगपति हैं जिनके पास दवाइयां बनाने के उद्योग हैं कारखाने हैं और भी जो सूचना तंत्र प्रणाली है इन सभी की सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी. इससे सभी के लिए स्वास्थ्य का अधिकार सुनिश्चित किया जा सकेगा.

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