सत्या राजपूत, रायपुर। गौ माता के रख-रखाव, दाना-पानी और गौठानों की बदहाल स्थिति को लेकर साधु-संत, किन्नर अखाड़ा और गौठान संचालकों ने शुक्रवार को नगर निगम मुख्यालय का घेराव कर दिया। घेराव करने वालों ने निगम के सामने गोबर लगाकर प्रदर्शन किया और कहा कि गौ माता कहीं सुरक्षित नहीं है। गौठानों में मौतें हो रही हैं और सड़कों पर मवेशी कुचले जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आज वे गौ माता के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं और अधिकार लेकर ही रहेंगे। कई बार बातचीत हुई, लेकिन समाधान नहीं निकला है।

गौ माता को लेकर हो रही राजनीति- सौम्या महामंडलेश्वर

किन्नर अखाड़ा की सौम्या महामंडलेश्वर ने कहा कि गौ माता को लेकर राजनीति हो रही है। हालात गंभीर हैं, कोई सुधार नहीं हो रहा है, हमें गौ माता के अधिकार चाहिए, चारा का अधिकार और रहने का अधिकार। कई बार आवेदन दिए गए, चर्चा हुई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुई है। गौठानों की हालत सही नहीं है। 250 की क्षमता में कहीं 500 तो कहीं 800 से ज्यादा मवेशी हैं। सड़कों पर मौत हो रही है। कम जगह होने की वजह से गौठान सुरक्षित नहीं। हम सिर्फ सुरक्षित जगह और खाना चाहते हैं।

अंदर हो रही सारी रोटी- राजेश्वरानंद महाराज

छत्तीसगढ़ संत समाज के प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरानंद महाराज ने कहा कि पहली रोटी गाय को देनी चाहिए, लेकिन यहां सारी रोटी अंदर हो रही है। इसलिए आज हम आए हैं। यह अन्याय नहीं सहेंगे। नगर पालिक निगम रायपुर के अंतर्गत संचालित गौठानों की स्थिति दिनों-दिन बदतर होती जा रही है। शहर में घूमंतू मवेशियों का जमघट लगा है। वहीं गौठान संचालित करने वाली संस्थाएं बकाया भुगतान न मिलने से आर्थिक तंगी झेल रही हैं। पिछले कई महीनों से निगम द्वारा गौठान संचालकों को भुगतान नहीं किया गया है। इससे सूखा-हरा चारा, दाना और पानी की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है। पर्याप्त चारे के अभाव में मवेशियों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है

उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

संचालकों की प्रमुख समस्याएं लंबित भुगतान और सुविधाओं का अभाव हैं। फंड न मिलने से कर्मचारियों और चरवाहों का मानदेय तक नहीं दिया जा पा रहा। संचालकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द बकाया भुगतान और व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे गौठान संचालन बंद करने और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने महापौर और निगम आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

फुंडहर गौठान के संचालक विक्रांत शर्मा ने आयुक्त को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी संस्था के पास वर्तमान में लगभग 590 गौवंश संरक्षित हैं, जबकि निगम से केवल 260 पशु का टेंडर हुआ था। जोन-9 में मवेशी ज्यादा होने के कारण काउ कैचर द्वारा संख्या बढ़ाई गई, लेकिन अतिरिक्त मवेशियों का भुगतान नहीं हो रहा। उन्होंने अतिरिक्त शेड के लिए मिली सहायता राशि और तिरपाल की अस्थायी व्यवस्था का जिक्र करते हुए तीन दिनों के अंदर भुगतान की मांग की, अन्यथा स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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