पटना। नाबालिग से दुष्कर्म के गंभीर मामले में पटना हाईकोर्ट से बरी किए गए नवादा के पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। बिहार सरकार ने हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत उन्हें बरी किया गया था। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई है। शुक्रवार को इस अहम एसएलपी पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई, और अब मामले की अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद तय की गई है।

​सरकार ने रखे मजबूत कानूनी आधार और उठाए सवाल

​सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के दौरान बिहार सरकार की तरफ से कई गंभीर और कानूनी सवाल उठाए गए हैं। सरकार का मुख्य तर्क है कि इस मामले में पीड़िता एक बेहद भरोसेमंद गवाह है, और कानून के अनुसार केवल पीड़िता की मजबूत गवाही के आधार पर भी किसी भी दोषी को सजा सुनाई जा सकती है।
​इसके अलावा, सरकार ने हाईकोर्ट द्वारा पीड़िता के मैट्रिक सर्टिफिकेट को खारिज किए जाने के फैसले पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। सरकार का पक्ष है कि यह प्रमाण पत्र एक पूरी तरह से वैध दस्तावेज है, जिसे लेकर आरोपी पक्ष ने निचली अदालत में कभी कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी और न ही इसे कभी फर्जी बताया था। ऐसी स्थिति में, केवल मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता की उम्र का निर्धारण करना और उसके आधार पर आरोपी को बरी करना पूरी तरह से गलत और कानूनन त्रुटिपूर्ण है।

​गायब मेडिकल रिपोर्ट और चोट के निशान पर उठाए गए सवाल

​सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के अन्य पहलुओं पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट ने जिस महिला डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट को आधार बनाकर अपना फैसला सुनाया, वह रिपोर्ट मुकदमे के दौरान कभी अदालत में पेश ही नहीं की गई थी। यह दस्तावेज निचली अदालत या उच्च न्यायालय के आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा भी नहीं था, और अदालत द्वारा रिकॉर्ड से बाहर के ऐसे दस्तावेजों के आधार पर फैसला सुनाया जाना न्यायसंगत नहीं है।
​इसके साथ ही, सरकार ने इस तर्क को भी खारिज किया है कि पीड़िता के शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं होने से यह साबित होता है कि अपराध नहीं हुआ। सरकार का तर्क है कि हर मामले में बाहरी चोट होना अनिवार्य नहीं है।

​राजनीतिक पृष्ठभूमि और वर्तमान समीकरण

​इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजबल्लभ यादव के परिवार की राजनीतिक स्थिति पर भी लगातार चर्चा बनी हुई है। जब राजबल्लभ यादव जेल गए थे, तब उनकी पत्नी विभा देवी ने राजनीति में कदम रखा था। शुरुआत में वह राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के टिकट पर चुनाव लड़ा करती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने राजद से नाता तोड़ते हुए जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का दामन थाम लिया। वर्तमान समय में विभा देवी नवादा विधानसभा सीट से जदयू की विधायक हैं। पति के बरी होने के बाद से इस राजनीतिक परिवार का रसूख और स्थिति क्षेत्र में फिर से मजबूत होने की चर्चाएं तेज हो गईं थीं, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में सरकार के इस नए कदम से कानूनी लड़ाई फिर से दिलचस्प और गंभीर हो गई है।