कुंदन कुमार/पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में आंतरिक कलह एक बार फिर सतह पर आ गई है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम ने आज एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अपना गुस्सा और दर्द बयां किया। विधान परिषद (MLC) का टिकट न मिलने से आहत शिवचंद्र राम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फूट-फूटकर रो पड़े।
नेतृत्व पर वादाखिलाफी का आरोप
शिवचंद्र राम ने आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें विधान परिषद भेजने का स्पष्ट आश्वासन दिया था लेकिन अंतिम समय में उन्हें दरकिनार कर दिया गया। उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील सिंह को एमएलसी बनाने के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि यह महज एक टिकट का सवाल नहीं है बल्कि एक निष्ठावान कार्यकर्ता के साथ किए गए धोखे का मामला है।
दलित समाज का अपमान
शिवचंद्र राम ने इसे व्यक्तिगत अपमान के साथ-साथ पूरे दलित समाज की उपेक्षा करार दिया। उन्होंने आक्रोशित होते हुए कहा कि वर्षों से पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं की अनदेखी की जा रही है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में दलितों और पिछड़ों के नाम पर राजनीति तो की जाती है, लेकिन जब भागीदारी देने की बात आती है, तो नेतृत्व पीछे हट जाता है।
SC/ST प्रकोष्ठ से दिया इस्तीफा
इस घटनाक्रम के बाद शिवचंद्र राम ने राजद के एससी/एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे और अब पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाना अनिवार्य हो गया है।
क्या राजद छोड़ेंगे शिवचंद्र राम?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या वे राजद का दामन छोड़ देंगे? इस पर शिवचंद्र राम ने फिलहाल चुप्पी साधे रखी। उन्होंने सीधे तौर पर पार्टी छोड़ने की घोषणा तो नहीं की, लेकिन उनके तेवर से स्पष्ट है कि पार्टी और उनके बीच की दूरियां काफी बढ़ गई हैं।
यह घटनाक्रम राजद के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, खासकर तब जब पार्टी अपने वोट बैंक को एकजुट रखने की कोशिश कर रही है। शिवचंद्र राम का यह कदम आने वाले समय में पार्टी में बड़े उलटफेर का संकेत दे रहा है।

