Rajasthan Chambal Sanctuary: राजस्थान के सवाई माधोपुर स्थित राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के पालीघाट में पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए बनाई गई योजना करीब तीन साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। वन विभाग ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से तीन वातानुकूलित टेंट तैयार कराए थे।

योजना के तहत पर्यटकों को एक रात ठहरने के लिए करीब 5 हजार रुपये किराया देना था। लेकिन तेज बारिश और चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने से टेंट क्षतिग्रस्त हो गए। इसके बाद उनकी मरम्मत और संचालन की योजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब विभाग इसी पर्यटन सीजन में टेंट दुरुस्त कराने की बात कह रहा है, जबकि मौके पर टेंट दिखाई नहीं देते।

तीन साल पहले बनी योजना, अब टेंट का पता नहीं

पालीघाट पर पर्यटकों के लिए रात्रि विश्राम की सुविधा विकसित करने के उद्देश्य से तीन वातानुकूलित टेंट बनवाए गए थे। इससे पर्यटकों को चंबल के प्राकृतिक वातावरण में ठहरने का अवसर मिलने की उम्मीद थी। साथ ही क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना थी।

हालांकि, अधिकारियों के बदलने और टेंट क्षतिग्रस्त होने के बाद इस परियोजना पर ध्यान नहीं दिया गया। नतीजा यह रहा कि योजना जमीन पर उतरने से पहले ही ठप पड़ गई। अब स्थिति यह है कि मौके पर टेंट नजर तक नहीं आते। ऐसे में सरकारी राशि के इस्तेमाल और परियोजना की मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

एक रात ठहरने के लिए करीब 5 हजार रुपये किराये की थी योजना

योजना के तहत पर्यटकों के लिए एक रात के ठहराव का किराया करीब 5 हजार रुपये निर्धारित करने की तैयारी थी। इसका उद्देश्य पालीघाट आने वाले पर्यटकों को रुकने की सुविधा देना और क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना था।

चंबल का प्राकृतिक वातावरण और घड़ियालों के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र पर्यटकों को आकर्षित कर सकता था। यहां ठहरने की व्यवस्था होने से पर्यटन गतिविधियां बढ़ने, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होने और वन विभाग की आय में इजाफा होने की उम्मीद थी। लेकिन टेंट की योजना शुरू नहीं हो पाने से ये संभावनाएं अब तक साकार नहीं हो सकीं।

टेंट मौके पर नहीं, फिर मरम्मत किसकी होगी?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल टेंट की मौजूदा स्थिति को लेकर है। वन विभाग का कहना है कि तेज बारिश और चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने से टेंट क्षतिग्रस्त हो गए थे। विभाग की ओर से इसी पर्यटन सीजन में फाउंडेशन की राशि से उनकी मरम्मत कराने की बात कही जा रही है।

लेकिन मौके पर टेंट दिखाई नहीं देने से मरम्मत और संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। विभाग ने टेंट दोबारा शुरू करने की बात तो कही है, लेकिन इसके लिए कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

वन विभाग ने जल्द शुरू करने की कही बात

पालीघाट के रेंजर किशन कुमार सांखला के अनुसार, पहले तेज बारिश और चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण टेंट क्षतिग्रस्त हो गए थे। उन्होंने कहा कि जल्द ही टेंट की मरम्मत कराकर उन्हें शुरू किया जाएगा। अब देखना होगा कि विभाग की यह योजना कब तक जमीन पर उतरती है। फिलहाल पालीघाट में पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए बनाई गई सुविधा शुरू होने का इंतजार है।

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