Rajasthan Congress News: राजस्थान में जिला परिषद चुनाव के टिकट को लेकर कांग्रेस में नाराजगी सामने आई है। मंगलवार को रूपबास निवासी 37 वर्षीय योगेंद्र भाजपा जिला कार्यालय के पास बनी पानी की टंकी पर चढ़ गया। वह जिला परिषद के वार्ड नंबर 21 से कांग्रेस का टिकट मांग रहा था।

योगेंद्र ने टिकट वितरण में भ्रष्टाचार और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप लगाए। उसने दावा किया कि 18 साल तक पार्टी के लिए काम करने और करीब 35 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद उसे चुनाव लड़ने का मौका नहीं दिया गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

टिकट वितरण में भ्रष्टाचार का आरोप

योगेंद्र ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर टिकट वितरण में गड़बड़ी करने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उसका दावा है कि वह लंबे समय से पार्टी के संगठनात्मक कामों में सक्रिय रहा है, लेकिन उसे चुनाव लड़ने का अवसर नहीं दिया जा रहा। योगेंद्र इस बार जिला परिषद के वार्ड नंबर 21 से चुनाव लड़ना चाहता था। उसने आरोप लगाया कि इस वार्ड के टिकट वितरण में भी पैसे का लेनदेन हुआ है। हालांकि, ये आरोप योगेंद्र ने लगाए हैं। इनके समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष बोले- अभी टिकट फाइनल नहीं

मामले पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश सूपा ने कहा कि जिला परिषद चुनाव के लिए अभी तक किसी भी प्रत्याशी का टिकट फाइनल नहीं किया गया है। ऐसे में योगेंद्र का पानी की टंकी पर चढ़ना बेवजह है। उन्होंने कहा कि नाराजगी जताने का यह तरीका गलत है। सूपा के मुताबिक, उनकी फोन पर योगेंद्र से बात हुई है और पार्टी उसकी बात सुनेगी।

पुलिस ने समझाकर सुरक्षित नीचे उतारा

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। ट्रैफिक सीओ योगेश ने बताया कि टंकी पर चढ़े व्यक्ति से बातचीत कर उसे समझाया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। पुलिस की समझाइश के बाद स्थिति सामान्य हो गई।

2008 में NSUI से शुरू किया था राजनीतिक सफर

योगेंद्र के मुताबिक, उसने वर्ष 2008 में NSUI बयाना के ब्लॉक सचिव के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया था। उस समय धीरज गुर्जर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। जेपी शर्मा जिला स्तर पर और धीरू पाराशर बयाना ब्लॉक अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। योगेंद्र ने बताया कि वर्ष 2011 में वह बयाना का चुनाव प्रभारी बना। इस दौरान उसने विभिन्न समाजों के लोगों को चुनाव में टिकट दिलाने और उन्हें जिताने के लिए काम किया।

उसके अनुसार, वर्ष 2017 में वह युवा कांग्रेस का जिला सचिव और 2018 में NSUI का प्रदेश सचिव बना। उसने दावा किया कि वर्ष 2008 से लगातार संगठन के लिए काम करते हुए जयपुर और दिल्ली में आयोजित धरनों और आंदोलनों में हिस्सा लिया। योगेंद्र का कहना है कि वह अब तक पार्टी के लिए करीब 35 लाख रुपये खर्च कर चुका है।

पिछले चुनाव में भी टिकट नहीं मिलने का दावा

योगेंद्र ने बताया कि करीब पांच साल पहले उसने जिला परिषद के वार्ड नंबर 22 से कांग्रेस का टिकट मांगा था, लेकिन तब भी उसे टिकट नहीं मिला। उसने उस समय के तत्कालीन विधायक पर अपने करीबी लोगों को टिकट दिलाने में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस बार उसने वार्ड नंबर 21 से चुनाव लड़ने की तैयारी की थी। योगेंद्र का आरोप है कि उसे टिकट देने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया गया। उसने इस बार भी टिकट वितरण में गड़बड़ी और पैसे के लेनदेन का दावा किया है।

चुनाव प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल

योगेंद्र ने कांग्रेस के चुनाव प्रभारी मुरारी लाल मीणा से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें बताया गया था कि टिकट देने का फैसला स्थानीय नेतृत्व करेगा। इस पर उसने सवाल उठाया कि अगर टिकट का निर्णय स्थानीय नेतृत्व को ही करना है, तो चुनाव प्रभारी की भूमिका क्या है?

योगेंद्र ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के युवाओं तथा महिलाओं को आगे बढ़ाने के संदेशों का जिक्र करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को भी अवसर मिलना चाहिए। उसने पार्टी में युवाओं को 50 प्रतिशत टिकट देने की बात को व्यवहार में लागू करने की मांग की।

फिलहाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि जिला परिषद चुनाव के लिए टिकटों का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। ऐसे में योगेंद्र की नाराजगी और टिकट वितरण को लेकर लगाए गए आरोपों पर पार्टी का अगला कदम महत्वपूर्ण होगा।

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