Rajasthan Cyber Crime Advisory: राजस्थान में सरकारी योजनाओं और कैशबैक के नाम पर साइबर ठगी के मामले सामने आने के बीच पुलिस की साइबर क्राइम विंग ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है। सोशल मीडिया पर नेताओं और प्रमुख जनप्रतिनिधियों के फर्जी वीडियो दिखाकर आर्थिक सहायता का लालच दिया जा रहा है।
इसके बाद लोगों से रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस या UPI के जरिए पैसे लेने की कोशिश की जाती है। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर जारी एडवाइजरी में पुलिस ने लोगों को ऐसे विज्ञापनों और कॉल से सतर्क रहने की सलाह दी है।

नेताओं के फर्जी वीडियो से लोगों को बनाया जा रहा निशाना
राजस्थान पुलिस के एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह के अनुसार, Facebook और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भ्रामक विज्ञापनों के जरिए वित्तीय ठगी की घटनाएं बढ़ रही हैं। इन विज्ञापनों में प्रसिद्ध सार्वजनिक और राजनीतिक हस्तियों की फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया जाता है। ठग नकली सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार करते हैं। वीडियो या विज्ञापन के जरिए लोगों को आर्थिक सहायता मिलने का भरोसा दिलाया जाता है। इसके बाद उन्हें फोन नंबर, WhatsApp अकाउंट या किसी वेबसाइट पर संपर्क करने के लिए कहा जाता है।
रजिस्ट्रेशन फीस से वेरिफिकेशन चार्ज तक, ऐसे मांगते हैं पैसे
पुलिस की एडवाइजरी के मुताबिक, कुछ मामलों में साइबर ठग विदेशी नंबरों से फोन करते हैं। इनमें +92 कोड वाले नंबर भी शामिल हैं। लोगों से योजना का लाभ दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, टैक्स या वेरिफिकेशन फीस मांगी जाती है। शुरुआत में छोटी रकम मांगी जा सकती है, लेकिन भुगतान करने के बाद भी कथित योजना का लाभ नहीं मिलता। इस तरह लोग ठगी का शिकार हो सकते हैं। पुलिस ने जनप्रतिनिधियों या उनके कार्यालय के नाम पर आने वाले संदिग्ध कॉल और संदेशों की पुष्टि आधिकारिक माध्यमों से करने की सलाह दी है।
स्क्रैच कार्ड और Spin-and-Win के नाम पर भी ठगी
साइबर अपराधी केवल सरकारी योजनाओं का ही सहारा नहीं लेते। कुछ मामलों में स्क्रैच कार्ड और Spin-and-Win प्रतियोगिताओं के जरिए नकली कैशबैक या पुरस्कार जीतने का लालच दिया जाता है। इसके बाद पीड़ित को भुगतान ऐप पर भेजकर UPI Collect Request स्वीकार करने के लिए कहा जाता है। कई बार UPI PIN डालने के लिए भी बहकाया जाता है। ऐसी रिक्वेस्ट स्वीकार करने पर व्यक्ति के बैंक खाते से रकम कट सकती है और साइबर अपराधियों के खाते में जा सकती है।
सरकारी योजना के विज्ञापन पर क्लिक करने से पहले करें जांच
राजस्थान पुलिस ने लोगों को किसी भी सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा करने से पहले संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर योजना की जानकारी जांचने की सलाह दी है। पुलिस के मुताबिक, किसी जनप्रतिनिधि या उनके कार्यालय के नाम से +92 नंबर से कॉल या संदेश आए तो सतर्क रहें। ऐसे कॉल पर बातचीत आगे बढ़ाने के बजाय संबंधित कार्यालय से सीधे संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें। इसके अलावा आधार, पैन, बैंक खाते की जानकारी, OTP या UPI PIN किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। जनप्रतिनिधियों के वीडियो और ऑडियो संदेशों को भी आधिकारिक स्रोत से जांचे बिना सच न मानें।
ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
- सरकारी योजना की पुष्टि संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से करें।
- अनजान लिंक और संदिग्ध सोशल मीडिया विज्ञापनों पर क्लिक करने से बचें।
- पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। PIN डालने से भुगतान हो सकता है।
- किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, बैंक विवरण या UPI PIN न बताएं।
- संदिग्ध विज्ञापन और अकाउंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें।
- शिकायत से जुड़े संदेश, नंबर और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखें।
- बिना पुष्टि ऐसे विज्ञापनों को दूसरों के साथ साझा न करें।
साइबर ठगी होने पर कहां करें शिकायत?
राजस्थान पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी का शिकार होने या ठगी की आशंका होने पर तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस थाने को सूचना दें। ऑनलाइन शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। पुलिस मुख्यालय के साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 और 9257510100 पर संपर्क करके भी मदद ली जा सकती है। समय रहते शिकायत करने और संबंधित साक्ष्य सुरक्षित रखने से कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
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