नई दिल्ली। राजस्थान साइबर क्राइम पुलिस ने एक अंतर्राज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। इस सिंडिकेट पर आरोप है कि उसने नकली ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग स्कीम के ज़रिए देशभर के लोगों से लगभग 500 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
आरोपी की पहचान युवराज सतीश मुदलियार (35) के तौर पर हुई है। साइबर पुलिस की लंबी जांच के बाद उसे पुणे के लोहगांव से गिरफ्तार किया गया। उसे प्रोडक्शन वारंट पर जयपुर लाया गया है और फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।
16 लाख रुपये की धोखाधड़ी की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई
जांच तब शुरू हुई जब सदाराम चौधरी ने 23 फरवरी, 2024 को राजस्थान राज्य साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ 16 लाख रुपये की धोखाधड़ी हुई है।
शिकायत के मुताबिक, उन्हें “105 IND STOCKS ADV” नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां उन्हें ज़्यादा रिटर्न का वादा करके ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कीम में निवेश करने के लिए मनाया गया। निवेश करने के बाद, कथित तौर पर उनके सारे पैसे डूब गए।
तकनीकी जांच से धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क का पता चला
जांच के दौरान, साइबर पुलिस ने चैट रिकॉर्ड, बैंक अकाउंट, फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन और डिजिटल सबूतों की जांच की। अधिकारियों को जल्द ही एहसास हुआ कि यह मामला एक बहुत बड़े ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें पूरे भारत के लोग शिकार बने हैं।
जांच से पता चला कि सिंडिकेट ने कथित तौर पर लगभग 500 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी की थी, जिसके बाद ग्रुप की गतिविधियों की व्यापक जांच शुरू की गई।
कैसे काम करता था स्कैम
जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल करके लोगों को नकली इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग के मौकों के बारे में बताकर लुभाता था। शुरुआत में पीड़ितों को छोटी रकम निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था और उनका भरोसा जीतने के लिए उन्हें रिटर्न भी दिखाया जाता था।
जब वे बड़ी रकम निवेश कर देते थे, तो धोखाधड़ी करने वाले कथित तौर पर सारे पैसे निकाल लेते थे, पीड़ितों को व्हाट्सएप ग्रुप से हटा देते थे, चैट हिस्ट्री डिलीट कर देते थे और सारा संपर्क खत्म कर देते थे।
बैंक अकाउंट खोलने के लिए नकली फाइनेंस फर्मों का इस्तेमाल
पूछताछ के दौरान, आरोपी ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि वह ग्रेस फाइनेंस, पॉजिटिव बैलेंस और गुरु फाइनेंस नाम से लोन देने वाली फर्में चलाता था।
पुलिस ने बताया कि ये फर्में लोन देने के बहाने लोगों से पैन कार्ड, आधार कार्ड, सैलरी स्लिप और बैंक स्टेटमेंट इकट्ठा करती थीं। इन डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करके उनके नाम पर बैंक अकाउंट खोले जाते थे और अकाउंट होल्डर्स को कथित तौर पर कमीशन के तौर पर लगभग 10,000 रुपये दिए जाते थे।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि बाद में इन अकाउंट्स का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी से मिले पैसे को हासिल करने के लिए किया जाता था। आरोप है कि आरोपी इन अकाउंट्स से जुड़े ATM कार्ड, चेक बुक और पासबुक अपने पास रखते थे।
हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए पैसे का लेन-देन
पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी से मिले पैसे को कथित तौर पर कैश में निकाला गया और हवाला चैनलों के ज़रिए ट्रांसफर किया गया। इसके बाद इस पैसे को क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म (जैसे Binance वॉलेट) में भेजा गया, जिससे पैसे के लेन-देन का पता लगाना मुश्किल हो गया।
जांच करने वाले अधिकारी अब आरोपी से जुड़े फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन और डिजिटल एसेट्स की जांच कर रहे हैं।
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