Rajasthan Drought News: राजस्थान में कम बारिश और सूखे की आशंका को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस पश्चिमी राजस्थान के किसानों और पशुपालकों की परेशानी का हवाला देकर तत्काल राहत देने की मांग कर रही है।

वहीं, कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बुधवार को कहा कि प्रदेश के 8 से 10 जिलों में बारिश कम हुई है। प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे पूरा होने और अकाल घोषित करने की प्रक्रिया के बाद राहत कार्य शुरू किए जाएंगे।

राजस्थान के 8 से 10 जिलों में कम बारिश

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार को अधिकारियों से लगातार जानकारी मिल रही है। जिला कलेक्टर और संबंधित अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि सर्वे की प्रक्रिया में समय लगता है और राजस्व विभाग इसे पूरा कर रहा है। रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मीणा के मुताबिक, सर्वे पूरा होने और अकाल घोषित किए जाने के बाद राहत कार्य शुरू होंगे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से इस मुद्दे पर भ्रम नहीं फैलाने की अपील भी की।

पश्चिमी राजस्थान के गांवों में सूखे जैसे हालात का दावा

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अक्टूबर की शुरुआत में पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात होने का दावा किया था। उनके अनुसार, जोधपुर के करीब 2,000 गांवों, बाड़मेर के 2,460 गांवों, बालोतरा के 1,216 गांवों और जैसलमेर के 961 गांवों में स्थिति चिंताजनक है।

गहलोत ने बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और जोधपुर में कम बारिश के असर का भी उल्लेख किया। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति का आकलन कृषि और राजस्व विभाग के सर्वे के बाद होगा।

गहलोत ने की गिरदावरी और राहत कार्य शुरू करने की मांग

अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर सूखे की गंभीरता को नहीं समझने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में पानी और चारे की कमी से किसान और पशुपालक परेशान हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने जल्द गिरदावरी कराने, प्रभावित क्षेत्रों को अकालग्रस्त घोषित करने और राहत कार्य शुरू करने की मांग की। उन्होंने पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने, पेयजल की व्यवस्था करने और पशु राहत शिविर शुरू करने की जरूरत बताई। गहलोत ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और राहत कार्यों के लिए केंद्र सरकार से मदद लेने की अपील भी की।

किसानों और पशुपालकों को राहत के लिए सर्वे पर टिकी नजरें

कम बारिश का असर केवल फसलों तक सीमित नहीं रहता। इससे पशुओं के लिए चारे, ग्रामीण इलाकों में पेयजल और किसानों की आजीविका से जुड़ी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।

फिलहाल राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करा रही है। कृषि और राजस्व विभाग की रिपोर्ट के बाद ही सूखे की स्थिति का आकलन स्पष्ट होगा। सरकार के मुताबिक, अकाल घोषित करने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राहत कार्य शुरू किए जाएंगे। वहीं, कांग्रेस जल्द गिरदावरी और राहत उपाय लागू करने की मांग कर रही है।

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