Rajasthan School Politics: राजस्थान में सरकारी स्कूलों के निरीक्षण को लेकर सियासत गरमा गई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभियान और सरकारी स्कूलों में निरीक्षण को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने कहा है कि राजस्थान के शैक्षणिक संस्थानों को राजनीतिक टकराव का मैदान नहीं बनने दिया जाएगा। संगठन के मुताबिक, स्कूल में जाने के लिए किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल प्रमुख से औपचारिक अनुमति लेनी होगी।

CJP के अभियान पर शिक्षक संघ की आपत्ति

CJP ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान शुरू किया है। संगठन ने आरोप लगाया था कि एक स्कूल भैंसों के तबेले में संचालित किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत CJP की टीम शुक्रवार, 21 अगस्त को स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करने रामपुरा कंवरपुरा गांव पहुंची थी।

इस दौरान टीम का स्थानीय ग्रामीणों के साथ विवाद हो गया। अगले दिन CJP और ग्रामीणों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। दोनों पक्षों की ओर से मारपीट और हंगामे के आरोप लगाए गए हैं।

शिक्षक संघ ने सरकार का बचाव करने से किया इनकार

शिक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य सरकार का बचाव करना नहीं है। संगठन ने कहा कि वह राजनीतिक फायदे के लिए स्कूल परिसर को सियासी मुद्दा बनाने के खिलाफ है।

संगठन के मुताबिक, प्रशासनिक आदेशों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना या शिक्षकों पर किसी तरह का दबाव बनाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर क्या कहा?

ABRSM के प्रदेश उपाध्यक्ष पुरणमल नागर ने कहा कि बाहरी राजनीतिक कार्यकर्ताओं की ओर से स्कूल का निरीक्षण करने की कोशिश की गई। इसके विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। इसी दौरान कहासुनी हुई और बाद में मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

ABRSM के मीडिया प्रकोष्ठ के सुरेश कुमार बैरागी ने कहा कि स्कूल परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने वाला हालिया आदेश मीडिया पर भी लागू होता है।

स्कूलों को राजनीतिक टकराव से दूर रखने की मांग

शिक्षक संगठनों का कहना है कि स्कूल और शैक्षणिक संस्थान शिक्षा के केंद्र हैं। इन्हें राजनीतिक विवाद और टकराव का मैदान नहीं बनाया जाना चाहिए।

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षकों पर किसी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की बात सामने आती है।

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