Rajasthan High Court Divorce Judgment: पत्नी की मेडिकल स्थिति, वेतन और दूसरी निजी जानकारियां हासिल करने के लिए बार-बार सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन करना मानसिक क्रूरता हो सकती है। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में यह टिप्पणी करते हुए पत्नी के पक्ष में फैमिली कोर्ट से पारित तलाक की डिक्री बरकरार रखी है।

न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह और न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने पति की अपील खारिज कर दी। अदालत ने पत्नी पर निराधार आरोप लगाने, उसका ATM कार्ड अपने पास रखकर वेतन निकालने और गर्भावस्था के दौरान उचित देखभाल नहीं करने जैसे व्यवहारों को भी क्रूरता माना।

पत्नी की निजी जानकारी जुटाने के लिए लगाई RTI

मामले में महिला झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थी। उसने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल कर पति पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।

महिला की ओर से पेश एडवोकेट शोभित झाझरिया के अनुसार, पति ने उसके कार्यालय में RTI आवेदन देकर मेडिकल कंडीशन, वेतन और दूसरी निजी जानकारियां हासिल करने की कोशिश की थी। महिला का आरोप था कि इन आवेदनों का उद्देश्य उसे मानसिक रूप से परेशान करना और विभाग में उसकी छवि को नुकसान पहुंचाना था।

ATM कार्ड रखकर निकालता था पूरा वेतन

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने उसका ATM कार्ड अपने पास रख लिया था और उससे उसका पूरा वेतन निकाल लेता था। इसके अलावा वह पत्नी के सहकर्मियों के साथ अनुचित संबंध होने के निराधार आरोप भी लगाता था। महिला के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान भी उसे पर्याप्त भोजन और उचित देखभाल नहीं मिली। पति ने 4 नवंबर 2018 को उसे दोनों बेटियों के साथ घर से बाहर निकाल दिया था।

फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार

फैमिली कोर्ट ने 29 अप्रैल 2024 को महिला के पक्ष में तलाक की डिक्री पारित की थी। पति ने इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने पाया कि दंपती वर्ष 2018 से अलग रह रहे हैं और उनके दोबारा साथ रहने की वास्तविक संभावना नहीं है। ऐसे में खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के तलाक देने के फैसले को उचित माना और पति की अपील खारिज कर दी।

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