Rajasthan High Speed Trial Track: राजस्थान के नागौर जिले में सांभर झील के किनारे बन रहे देश के पहले हाईस्पीड ट्रायल ट्रैक का उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक पंकज शर्मा ने निरीक्षण किया। उन्होंने निरीक्षण वाहन से गुढ़ासाल्ट से ठठाना मीठड़ी तक ट्रायल ट्रैक की स्थिति देखी और निर्माण कार्यों, तकनीकी तैयारियों तथा परीक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली। करीब 820 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह 63.56 किलोमीटर लंबा ट्रैक ट्रेनों को 230 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ाकर उनकी क्षमता, स्थिरता और सुरक्षा परखने के लिए तैयार किया जा रहा है। रेलवे के अनुसार दिसंबर तक यहां ट्रायल शुरू होने की उम्मीद है।

निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक ने ट्रैक निर्माण, बिछाई जा चुकी पटरियों, तकनीकी संरचनाओं और परीक्षण सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को शेष काम निर्धारित मानकों के अनुसार समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही गुणवत्ता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा। जोधपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी सहित अन्य रेलवे अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति की जानकारी दी।
230 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से होगा परीक्षण
करीब 820 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस हाईस्पीड ट्रायल ट्रैक की लंबाई 63.56 किलोमीटर है। यहां हाईस्पीड रोलिंग स्टॉक और आधुनिक रेलवे तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा। ट्रेनों को 230 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ाकर उनकी क्षमता, स्थिरता और सुरक्षा संबंधी पहलुओं को परखा जाएगा।
ट्रैक पर अलग-अलग परीक्षण क्षेत्रों के साथ कर्व और त्वरित गति परीक्षण के लिए विशेष हिस्से भी बनाए जा रहे हैं। सिग्नलिंग, ट्रैक संरचना और आधुनिक सुरक्षा तकनीकों की भी जांच होगी।
दिसंबर तक शुरू हो सकता है ट्रायल
रेलवे अधिकारियों के अनुसार परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। बाकी तकनीकी काम तेजी से किए जा रहे हैं। ऐसे में दिसंबर तक ट्रायल गतिविधियां शुरू होने की उम्मीद है।
इस ट्रैक पर नई ट्रेनों के साथ सिग्नलिंग, ट्रैक संरचना, सुरक्षा और अन्य आधुनिक रेल तकनीकों का परीक्षण किया जा सकेगा। इससे यह परियोजना भविष्य की भारतीय रेल के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण केंद्र के रूप में विकसित हो सकती है।
एक ही ट्रैक पर होंगे कई तरह के परीक्षण
63.56 किलोमीटर लंबे ट्रायल ट्रैक में अलग-अलग जरूरतों के लिए कई हिस्से बनाए गए हैं।
- मुख्य लाइन: 23 किलोमीटर की मेन टेस्टिंग लाइन।
- हाईस्पीड लूप: 13 किलोमीटर का हाईस्पीड लूप।
- कर्व टेस्टिंग लूप: मोड़ पर ट्रेन की स्थिरता जांचने के लिए 20 किलोमीटर का कर्व लूप।
- एक्सीलेरेटेड टेस्टिंग लूप: त्वरित गति परीक्षण के लिए 3 किलोमीटर का विशेष लूप।
- पुल और स्टेशन: परियोजना में 7 बड़े पुल, 129 छोटे पुल और 4 नए स्टेशन शामिल हैं।
ट्रेन की सुरक्षा से लेकर सिग्नलिंग तक होगी जांच
ट्रायल ट्रैक पर ट्रेन डायनेमिक्स, व्हील ऑफलोडिंग, ट्रैक्शन, बोगी रोटेशन और सिग्नलिंग सिस्टम समेत कई तकनीकी पहलुओं की जांच की जाएगी। इसके अलावा दुर्घटना रोकने की क्षमता का भी परीक्षण होगा।
हाईस्पीड ट्रायल ट्रैक की खास बातें
| विशेषता | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | सांभर झील के किनारे, नागौर, राजस्थान |
| लंबाई | 63.56 किलोमीटर |
| लागत | करीब 820 करोड़ रुपये |
| अधिकतम परीक्षण गति | 230 किलोमीटर प्रति घंटा |
| मुख्य लाइन | 23 किलोमीटर |
| हाईस्पीड लूप | 13 किलोमीटर |
| कर्व टेस्टिंग लूप | 20 किलोमीटर |
| एक्सीलेरेटेड टेस्टिंग लूप | 3 किलोमीटर |
| बड़े पुल | 7 |
| छोटे पुल | 129 |
| नए स्टेशन | 4 |
| ट्रायल शुरू होने की उम्मीद | दिसंबर |
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