Rajasthan MSP Procurement: राजस्थान में खरीफ फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद में देरी का मुद्दा अब केंद्र सरकार तक पहुंच गया है। मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की खरीद समय पर शुरू नहीं होने से किसानों को खुले बाजार में कम कीमत पर उपज बेचनी पड़ रही है।

किसान महापंचायत ने गुरुवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर खरीद तत्काल शुरू करने और पहले हो चुके नुकसान की भरपाई की मांग की है। संगठन के मुताबिक, सितंबर में मंडियों में आई मूंग की उपज पर ही किसानों को 221 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
सितंबर में 7.70 लाख क्विंटल मूंग की आवक, किसानों को कम भाव मिला
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय संयोजक रामपाल जाट ने केंद्रीय मंत्री को भेजे पत्र में सितंबर महीने के मंडी आंकड़ों का हवाला दिया है। संगठन के अनुसार, इस दौरान राजस्थान की मंडियों में 7 लाख 70 हजार 481 क्विंटल मूंग की आवक हुई।
किसान महापंचायत का दावा है कि उस समय सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज खुले बाजार में MSP से कम कीमत पर बेचनी पड़ी। संगठन ने अनुमान लगाया है कि किसानों को प्रति क्विंटल करीब 3 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा। सितंबर की कुल आवक के आधार पर यह नुकसान 221 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है।
संगठन ने मांग की है कि जिन किसानों ने कम कीमत पर मूंग बेची है, उन्हें भावांतर भुगतान या कमी मूल्य भुगतान योजना के तहत अंतर की राशि दी जाए।
किसान 1 सितंबर से चाहते हैं MSP पर खरीद
रामपाल जाट ने अपने पत्र में कहा है कि राजस्थान सरकार की ओर से केंद्र की निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन की MSP पर खरीद के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। राज्य सरकार की ओर से मूंग की सरकारी खरीद 1 नवंबर से शुरू करने का आश्वासन भी दिया गया था।
किसानों का कहना है कि मूंग की फसल सितंबर की शुरुआत से ही मंडियों में पहुंचने लगती है। ऐसे में नवंबर से खरीद शुरू होने पर शुरुआती दिनों में उपज बेचने वाले किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाता।
किसान संगठनों की मांग है कि मूंग की खरीद हर साल 1 सितंबर से शुरू की जाए। इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्रालय से पहले भी लिखित और मौखिक आग्रह किए जाने का दावा किया गया है। लेकिन खरीद प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं होने से किसानों को अपनी फसल कम कीमत पर बेचनी पड़ी।
MSP से 3 हजार रुपये तक कम भाव मिलने का दावा
इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,780 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। किसान महापंचायत का कहना है कि मंडियों में मूंग के भाव MSP से काफी नीचे रहे और कई किसानों को प्रति क्विंटल 3 हजार रुपये तक कम कीमत मिली।
संगठन के मुताबिक, अगर मंडियों में फसल पहुंचने के साथ ही सरकारी खरीद शुरू हो जाती तो किसानों को बेहतर मूल्य मिल सकता था। खरीद में देरी के कारण उन्हें खुले बाजार में उपलब्ध कीमत पर उपज बेचनी पड़ी।
देश के कुल मूंग उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 48 फीसदी से ज्यादा
किसान महापंचायत ने अपने पत्र में राजस्थान को मूंग उत्पादन के लिहाज से देश का प्रमुख राज्य बताया है। संगठन का दावा है कि पिछले कई वर्षों से देश के कुल मूंग उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 48 फीसदी से अधिक रही है और राज्य उत्पादन में पहले स्थान पर है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर में मंडियों में मूंग की आवक सितंबर के मुकाबले ज्यादा रही है। ऐसे में खरीद प्रक्रिया में देरी जारी रहने पर किसानों का नुकसान और बढ़ने की आशंका है।
दलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य का दिया हवाला
किसान महापंचायत ने वर्ष 2030-31 तक दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनने के राष्ट्रीय लक्ष्य का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिलना भी जरूरी है।
पत्र में मांग की गई है कि अरहर, मसूर, उड़द और चने की तरह मूंग की भी नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित की जाए। संगठन के अनुसार, दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देना जरूरी है।
केंद्र सरकार के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें
किसान महापंचायत ने केंद्रीय कृषि मंत्री को भेजे पत्र में पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:
- मूंग, उड़द, मूंगफली और सोयाबीन सहित सभी खरीफ दलहन और तिलहन फसलों की MSP पर खरीद तत्काल शुरू की जाए।
- अगले वर्षों में मूंग की सरकारी खरीद 1 सितंबर से शुरू करने की व्यवस्था हो।
- MSP से कम कीमत पर फसल बेच चुके किसानों को भावांतर भुगतान के जरिए नुकसान की भरपाई दी जाए।
- दलहन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के तहत मूंग की शत-प्रतिशत खरीद नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से सुनिश्चित की जाए।
- तिलहन फसलों के लिए भी MSP की प्रभावी गारंटी और पर्याप्त सरकारी खरीद व्यवस्था बनाई जाए।

