Rajasthan News: राजस्थान के झुंझुनूं में भ्रष्टाचार का एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है जिसे सुनकर खुद जिला कलेक्टर भी हैरान रह गए हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों ने फाइलों में हेराफेरी कर न केवल सड़क का रास्ता बदल दिया, बल्कि 2 करोड़ रुपए का बजट भी ठिकाने लगा दिया। जिस गांव की किस्मत चमकनी थी, वहां के लोग आज भी धूल फांक रहे हैं और जहां जरूरत नहीं थी, वहां रातों-रात सड़क बिछा दी गई। इस कागजी खेल का खुलासा होते ही पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।

श्योलपुरा के नाम पर बजट, तातीजा में बिछा दी डामर
मामला श्योलपुरा (देवता) गांव का है। साल 2023-24 में मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत श्योलपुरा से तातीजा सीमा तक 5 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए 2 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उनके गांव की राह आसान होगी, लेकिन PWD के अधिकारियों ने अपने चहेतों और रसूखदारों को फायदा पहुंचाने के लिए सड़क का रूट ही बदल दिया। कागजों में तो सड़क श्योलपुरा में बनी दिखाई गई, लेकिन हकीकत में इसे तातीजा इलाके में बना दिया गया।
पीले पत्थर ने खोल दी विभाग की पोल
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब सोमवार को ग्रामीण तातीजा की तरफ निकले। वहां सड़क किनारे लगे माइलस्टोन (पीले पत्थर) को देखकर लोग चौंक गए। उन पत्थरों पर ‘श्योलपुरा’ लिखा हुआ था, जबकि सड़क तातीजा से देवाला जोहड़ की तरफ जा रही थी। पूर्व सरपंच हुकमीचंद ने बताया कि पत्थरों पर गांव का नाम देखकर समझ आया कि बजट कहीं और का था और काम कहीं और कर दिया गया। सेवानिवृत्त व्याख्याता मांगूराम तंवर ने इसे जनता के पैसे के साथ सीधा धोखा करार दिया है।
कलेक्टर बोले- 2 साल तक किसी को पता क्यों नहीं चला?
इस मामले को लेकर जब ग्रामीणों ने किसान महासभा के कामरेड रामचंद्र कुलहरि के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट का घेराव किया, तो प्रशासन की नींद खुली। जिला कलेक्टर अरुण कुमार गर्ग ने मामले को बेहद गंभीर और अजीब बताते हुए कहा, यह वाकई हैरान करने वाला है कि पूरी सड़क ही दूसरी जगह बना दी गई और दो साल तक किसी को कानोकान खबर नहीं हुई। कलेक्टर ने PWD के एसई (SE) को तुरंत तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने और दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।
दोषियों से हो वसूली- ग्रामीण
गुस्साए ग्रामीणों ने मांग की है कि जिस ठेकेदार और तकनीकी अधिकारी ने सड़क का रूट बदला, उन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाए। साथ ही, सरकारी धन के दुरुपयोग की भरपाई भी उन्हीं अधिकारियों की जेब से की जाए। ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक श्योलपुरा से गोरधनपुरा के लिए मंजूर सड़क का निर्माण शुरू नहीं होता और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
