Rajasthan News: राजस्थान की वित्तीय सेहत और प्रशासनिक दक्षता को लेकर भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। मार्च 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष की ऑडिट एग्जीक्यूटिव समरी में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुई भारी वित्तीय अनियमितताओं और ब्लाइंड स्पॉट्स का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट साफ तौर पर संकेत देती है कि राज्य में पैसा पानी की तरह बहाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर उसके परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

वित्तीय अनुशासन की धज्जियां उड़ीं
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 65,853.84 करोड़ रुपये के वित्तीय दायरे में खर्च और प्रबंधन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 23,975 करोड़ रुपये की योजनाओं में प्रक्रियागत कमियां, लक्ष्यों से भटकाव और निगरानी का अभाव पाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल बजट बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है; जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, सार्वजनिक संसाधनों का लाभ जनता तक नहीं पहुंचेगा।
ऑडिट के 5 मुख्य ब्लैक होल
- उपयोगिता प्रमाणपत्र (UC) का अभाव: अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद समय पर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा नहीं किए गए।
- निगरानी तंत्र फेल: योजनाओं के मूल्यांकन की कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखी।
- खर्च में विसंगति: बजट की स्वीकृतियों और वास्तविक व्यय के आंकड़ों में भारी अंतर पाया गया।
- परिणाम शून्य: कई योजनाओं के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव को मापा ही नहीं जा सका।
- डेटा में गड़बड़ी: नीति निर्धारण और क्रियान्वयन के बीच तालमेल की भारी कमी उजागर हुई है।
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