Rajasthan News: कंज्यूमर कोर्ट ने निजी बीमा कंपनी की ओर से बीमा क्लेम खारिज करने को अनिता मानते हुए मृतक के पुत्र के पक्ष में सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि परिवादी को पूरी बीमा राशि, राइडर योजना की राशि तथा हर्जाना अदा किया जाए। परिवादी हिमांशु गहलोत ने जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम के समक्ष प्रस्तुत परिवाद में बताया कि उनके पिता महेंद्र गहलोत ने एक्सीड लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से जीवन बीमा पॉलिसी खरीदी थी।

पॉलिसी जारी करने से पहले कंपनी की ओर से उनकी चिकित्सीय जांच भी करवाई गई थी। बीमा अवधि के दौरान उनके पिता का निधन हो गया। नामांकित व्यक्ति के रूप में हिमांशु गहलोत ने बीमा क्लेम प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि मृतक को पहले से हृदय रोग था और उन्होंने यह तथ्य छुपाया था। कंपनी ने केवल जमा प्रीमियम राशि लौटाकर मामले को समाप्त मान लिया और क्लेम खारिज करने को जायज ठहराया। आयोग प्रथम के अध्यक्ष राजकुमार सुथार व सदस्य दिलशाद अली ने परिवादी के पक्ष में निर्णय देकर कहा कि कंपनी कोई सबूत पेश नहीं कर सकी, जिससे साबित हो कि बीमा से पहले मृतक को किसी प्रकार का हृदय रोग था।
कंपनी ने जांच करवाकर ही प्रीमियम लिखा था
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जब कंपनी ने स्वयं मेडिकल जांच करवाकर प्रीमियम प्राप्त किया था, तो बाद में बीमारी छुपाने का आरोप लगाकर अपने दायित्व से पीछे नहीं हट सकती। आयोग ने कंपनी को 2.85 लाख रुपये बीमा राशि, राइडर योजना की राशि के साथ 21 हजार रु. हर्जाना अदा करने का आदेश दिया।
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